समिति में सेना के तीनों अंगों के उपप्रमुख, सचिव रक्षा (वित्त), एकीकृत स्टाफ कमेटी के प्रमुख, रक्षा लेखा महानियंत्रक और महानिदेशक (खरीद) और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रतिनिधि शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय ने सैन्य बलों से जुड़ी पूंजीगत खरीद, रसद, भंडार और संपत्ति के रखरखाव के ‘प्रदर्शन और दक्षता’ ऑडिट करने के लिए एक शीर्ष समिति का गठन किया है। रक्षा सचिव की अध्यक्षता वाली समिति, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को मंत्रालय के कामकाज के विभिन्न पहलुओं में आंतरिक निरीक्षण और जोखिम प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने में समग्र सुधार के उपायों पर सलाह देगी।
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समिति में सेना के तीनों अंगों के उपप्रमुख, सचिव रक्षा (वित्त), एकीकृत स्टाफ कमेटी के प्रमुख, रक्षा लेखा महानियंत्रक और महानिदेशक (खरीद) और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति का गठन सैन्य खरीद प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने और देश की समग्र युद्ध तैयारी को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों के बीच हुआ है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, रक्षा मंत्रालय ने अपनी गतिविधियों के विभिन्न पहलुओं में प्रदर्शन और दक्षता ऑडिट करने के लिए रक्षा सचिव की अध्यक्षता में एक शीर्ष समिति का संस्थागत तंत्र स्थापित किया है। मंत्रालय ने कहा, इस तरह के ऑडिट से परियोजनाओं के निष्पादन में अगर कोई खामी है तो मंत्रालय के शीर्ष प्रबंधन को मूल्यवान जानकारी मिलने की उम्मीद है और आंतरिक नियंत्रण, वित्तीय प्रक्रियाओं की सुदृढ़ता, जोखिम कारकों की पहचान में प्रणालीगत सुधार के बारे में सुझाव भी मिलेंगे।
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अभूतपूर्व संकट के दौर में श्रीलंका की हर संभव मदद कर रहा भारत: राजनाथ
वहीं, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अभूतपूर्व संकट से जूझ रहे श्रीलंका को भारत हर संभव मदद दे रहा है। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि भारत के नेपाल, भूटान, म्यांमार, मालदीव और बांग्लादेश से भी अच्छे और मजबूत संबंध हैं। भारत ने अपने द्विपक्षीय संबंधों मजबूत बनाए रखने के लिए कई प्रयास किए हैं।
राजनाथ ने कहा, कोविड-19 और यूक्रेन संकट से प्रभावित होने के बावजूद भारत मित्र श्रीलंका की हर संभव मदद करने की कोशिश कर रहा है। रक्षामंत्री ने शुक्रवार को ‘पीएसयू गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स’ द्वारा निर्मित पी17ए युद्धपोत ‘दूनागिरी’ का यहां हुगली नदी में जलावतरण किया। पी17ए पोत दिशानिर्देशित-मिसाइल युद्धपोत हैं। युद्धपोत के जलावतरण से पहले अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि भारतीय शिपयार्ड द्वारा पोत का इस तरह से जलावतरण किया जाना देश की आत्मनिर्भरता बढ़ने का प्रतीक है।