चीन और पाकिस्तान से लगती पहाड़ी सीमाओं से दुश्मन के विमानों की भारत में घुसपैठ से रोकने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। रक्षा मंत्रालय ने देश के आकाश प्राइम मिसाइलों की दो रेजीमेंटों को हासिल करने के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयारी कर ली है। इन आकाश मिसाइलों की 15,000 फीट की ऊंचाई पर तैनाती की जाएगी। इनका प्रदर्शन अपने पूर्ववर्ती मिसाइलों की तुलना में बेहतर होगा। इन्हें लद्दाख जैसे संवेदनशील ऊंचे स्थानों पर तैनात किया जाएगा, जहां इसकी सीमा पाकिस्तान और चीन दोनों से लगती है।
देश के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने आकाश मिसाइलों का निर्माण किया था और रक्षा बलों ने इसे काफी सफल और उपयुक्त माना है। सेना के पास पहले से ही आकाश मिसाइल की दो रेजीमेंट हैं। सेना चाहती है कि आकाश की दो नई रेजिमेंटों को पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनाती हो। सेना को मिसाइल सिस्टम की सर्विस को लेकर कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इसका उत्पादन दो कंपनियां भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनामिक्स लिमिटेड करती हैं। इसके बावजूद सेना मिसाइलों के प्रदर्शन को लेकर बेहद संतुष्ट है।
आकाश मिसाइलों की नई रेजिमेंट के प्रस्ताव कोे रक्षा के क्षेत्र में मेक इन इंडिया को मजबूती देने के लिए भी बड़ी पहल माना जा रहा है। पहले इन मिसाइलों के उत्पादन का ऑर्डर विदेशी कंपनियों को दिया जाना था, मगर नरेंद्र मोदी सरकार ने स्वदेश में इन मिसाइलों का उत्पादन किए जाने के पक्ष में फैसला किया। हाल ही में पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति ने वायुसेना के लिए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के सात स्क्वॉड्रन खरीदने की परियोजना को मंजूरी दी।
आकाश मध्यम रेंज की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। यह हवा में उड़ रहे लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम है। यह मिसाइल युद्धक विमान, क्रूज मिसाइल, हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइल और बैलेस्टिक मिसाइलों को निशाना बना सकती है। आकाश मिसाइलें ध्वनि की गति से ढाई गुना तेजी के साथ लक्ष्य तबाह कर सकती हैं। विशेष रडार सिस्टम और युद्धक सामग्रियों से लैस ये मिसाइलें एक साथ दुश्मनों के 40 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और सतह से हवा में 30 किमी की दूरी पर दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकती हैं।
रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को 3,300 करोड़ रुपये से अधिक की रक्षा खरीद को मंजूरी दे दी है। इसमें भारत में बनी टैंक भेदी गाइडेड मिसाइलें शामिल है, जो दुश्मन के टैंकों को नेस्तनाबूद करने में सक्षम हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में यह मंजूरी दी गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया के अनुरूप भारत में स्वदेशी निजी कंपनियों द्वारा रक्षा उपकरणों के डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।