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रक्षा मंत्रालय: राजनाथ सिंह का स्वदेशी तकनीक पर जोर, आईआईटी कानपुर कैसे बनेगा भारत की सैन्य ताकत का केंद्र?

Wed, 14 Oct 2026 11:03 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईआईटी कानपुर में ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान शुरू करते हुए स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने एआई, ड्रोन और साइबर सुरक्षा के लिए रक्षा बलों, डीआरडीओ, शिक्षण संस्थानों और निजी कंपनियों के सहयोग को जरूरी बताया। अभियान का लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब डॉलर जुटाना है। क्या आईआईटी कानपुर भारत की सैन्य तकनीक को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा?

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युद्ध के बदलते तरीकों पर राजनाथ सिंह की चेतावनी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युद्ध के बदलते तरीकों के बीच भारत में स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि देश को अपनी सैन्य जरूरतों के लिए विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने और खुद नई तकनीक तैयार करने की दिशा में तेजी से काम करना होगा। इसके लिए रक्षा बलों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), शैक्षणिक संस्थानों और निजी कंपनियों के बीच सहयोग जरूरी है। राजनाथ सिंह ने बुधवार को आईआईटी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ धन उगाही अभियान का शुभारंभ करते हुए तकनीकी आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताया।

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राजनाथ सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वायत्त प्रणाली, मानवरहित मंच और साइबर सुरक्षा जैसी तकनीकें युद्ध लड़ने के तरीके बदल रही हैं। ऐसे में भारत को अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि आईआईटी जैसे संस्थान शैक्षणिक शोध को सेना की वास्तविक जरूरतों और उद्योग की मांग से जोड़ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का ‘आत्मनिर्भर भारत’ का दृष्टिकोण ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारत को तकनीकी रूप से सक्षम, आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी और नवाचार के क्षेत्र में मजबूत बनाना है।

स्वदेशी रक्षा तकनीक बनाने में आईआईटी कानपुर की क्या भूमिका होगी?
रक्षा मंत्री ने आईआईटी कानपुर में डीआरडीओ-उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने संस्थान में रक्षा प्रौद्योगिकी स्कूल स्थापित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया। इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने की योजना पर भी काम आगे बढ़ रहा है। इसकी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने वाली है। इन पहलों का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र से जुड़ी तकनीकों पर शोध करना और उन्हें देश की जरूरतों के अनुसार विकसित करना है। राजनाथ सिंह ने विश्वास जताया कि रक्षा संस्थानों, वैज्ञानिकों और उद्योग के बीच साझेदारी से रणनीतिक महत्व की स्वदेशी तकनीकें तैयार की जा सकेंगी।
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एआई, ड्रोन और साइबर सुरक्षा सैन्य ताकत के लिए क्यों अहम हैं?
आधुनिक युद्ध में केवल सैनिकों और हथियारों की संख्या ही नहीं, बल्कि तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। एआई से जानकारी का विश्लेषण करने, स्वायत्त प्रणालियों से कई काम अपने आप करने और मानवरहित प्लेटफॉर्म से सैन्य अभियानों में मदद लेने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। वहीं, साइबर सुरक्षा डिजिटल प्रणालियों और महत्वपूर्ण सूचनाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है। राजनाथ सिंह ने इन तकनीकों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। आईआईटी में होने वाला शोध यदि सेना की जरूरतों के अनुरूप हो, तो नई तकनीकों को विकसित करने और उनका इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को कैसे मिलेगा फायदा?
राजनाथ सिंह ने कहा कि आईआईटी कानपुर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। संस्थान वैज्ञानिक शोध और उद्योग में उसके इस्तेमाल के बीच सेतु बन सकता है। कानपुर की औद्योगिक विरासत और आईआईटी की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर उद्यमिता, निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर सकती हैं। उन्होंने सी3आई साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र और मेडिकल स्कूल को भी महत्वपूर्ण पहल बताया। आईआईटी से विकसित तकनीक और नए उद्यम उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में योगदान दे सकते हैं।

‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान का लक्ष्य कितना बड़ा है?
आईआईटी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान का लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब डॉलर जुटाना है। इसे किसी भी आईआईटी की ओर से शुरू किया गया अब तक का सबसे बड़ा धन उगाही अभियान बताया गया है। संस्थान के पूर्व छात्रों, दानदाताओं, कॉरपोरेट भागीदारों और सरकार की ओर से अब तक 4,155 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई जा चुकी है। इस धन का इस्तेमाल शोध के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और स्वदेशी तकनीक के विकास में तेजी लाने के लिए किया जाएगा। आईआईटी संस्थानों ने अब तक छह हजार से अधिक स्टार्टअप, 56 यूनिकॉर्न और करीब पांच हजार पेटेंट को सहयोग दिया है। ये आंकड़े बताते हैं कि आईआईटी अब केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

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