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Defence Ministry: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया-2026 का मसौदा तैयार, सरकार ने जनता से मांगे सुझाव

Tue, 10 Feb 2026 10:14 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Defence Ministry: रक्षा विभाग ने 'रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2026' का मसौदा तैयार किया है, जो मंजूरी मिलने पर 2020 की प्रक्रिया की जगह लेगा। मसौदा आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव लेने के लिए जारी किया गया है, जिसमें एयरोस्पेस प्रणालियों और तेज बदलाव वाली तकनीकों के लिए नए नियम शामिल हैं। पढ़ें रिपोर्ट-
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रक्षा मंत्रालय - फोटो : रक्षा मंत्रालय
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विस्तार
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रक्षा विभाग ने 'रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2026' का मसौदा तैयार किया है। यह मसौदा सुधारों के वर्ष के तहत बनाया गया है। मंजूरी मिलने के बाद यह नई प्रक्रिया 'रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020' की जगह लेगी। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी। 
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बयान में बताया गया कि एयरोस्पेस प्रणालियों की खरीद से जुड़ी प्रक्रिया अलग से तैयार की जा रही है। इस पर सभी संबंधित पक्षों से सलाह ली जा रही है। बाद में इसे भी रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2026 में शामिल किया जाएगा।
 

परामर्श प्रक्रिया के तहत
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2026 का मसौदा और दिशा-निर्देशों व परिशिष्टों की पुस्तिका रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट (https://mod.gov.in)  पर उपलब्ध है।
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आम जनता से मांग सुझाव
सरकार ने सभी संबंधित पक्षों और आम जनता से इस मसौदे पर टिप्पणियां और सुझाव मांगे हैं। लोग अपने सुझाव ई-मेल (secy-dap2025@gov.in/tmls-mod@nic.in) के माध्यम से भेज सकते हैं। सुझाव वर्ड या पीडीएफ फाइल में भेजे जा सकते हैं। सुझाव भेजने की अंतिम तारीख तीन मार्च 2026 तय की गई है।

रक्षा मंत्रालय के बयान में क्या कहा गया?
बयान में कहा गया, भारत अपनी रक्षा यात्रा के एक बेहद अहम चरण में खड़ा है। पिछला दशक आत्मनिर्भरता की नींव रखने का था। आने वाला दशक तेज रफ्तार से आगे बढ़ने का होगा। यह अमृत काल का वह समय है, जो भारत को 2047 में दुनिया का नेतृत्व करने वाला बनाएगा। रक्षा तैयारियों में संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार सरकार की नीति का आधार हैं।
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इसमें कहा गया कि डीएपी 2026 पुराने तरीके से अलग सोच को दर्शाता है। पहले स्वदेशीकरण का मतलब विदेशी उपकरण भारत में बनाना था। अब लक्ष्य केवल 'मेड इन इंडिया' नहीं, बल्कि 'ओन्ड बाय इंडिया' है। सरकार तकनीक हस्तांतरण से आगे बढ़कर संयुक्त विकास और बौद्धिक संपदा के स्वामित्व पर जोर दे रही है। रक्षा खरीद में सोर्स कोड और डिजाइन के डाटा का नियंत्रण भारत के पास रखने को प्राथमिकता दी जाएगी।

आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती बजट नहीं, बल्कि तकनीक का तेजी से पुराना होना होगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम तकनीक और ड्रोन जैसे क्षेत्र बहुत तेजी से बदल रहे हैं। इसी को देखते हुए तेज बदलाव वाली तकनीकों के लिए नए खरीद नियम लाए गए हैं। अब सॉफ्टवेयर को भी हथियार जितना ही अहम माना गया है। भविष्य युद्दों में दोहरे उपयोग वाली तकनीकें अहम होंगी। नागरिक और सैन्य तकनीक के बीच की दूरी कम हो चुकी है। 




 
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