रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को भारतीय सेना के लिए वायु रक्षा फायर कंट्रोल रडार खरीदने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ 2,000 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। रडार लड़ाकू विमान, हमलावर हेलीकॉप्टर और दुश्मन के ड्रोन सहित तमाम हवाई खतरों का पता लगाने में सक्षम होंगे। 2,000 करोड़ रुपये की यह खरीद 'भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित श्रेणी' के ढांचे के तहत की जाएगी।
29,558.66 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान डीआरडीओ को 29,558.66 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। सेठ ने कहा कि पूरी की गई कुछ प्रमुख परियोजनाओं में नाग एमके-2, अस्त्र एमके-2, ध्रुवास्त्र - हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल, एमबीटी अर्जुन एमके-II के लिए एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, हवा से प्रक्षेपित सामरिक मिसाइलों के लिए सॉलिड फ्यूल डक्टेड रॉकेट रैमजेट तकनीक, एंटी-ड्रोन एयर-डिफेंस सिस्टम आदि शामिल हैं।
नई डीप-टेक और अत्याधुनिक नीतियों को मंजूरी दी
एक अलग प्रश्न में रक्षा मंत्रालय से पूछा गया कि क्या सरकार ने प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीडीएफ) योजना के तहत नई डीप-टेक और अत्याधुनिक नीतियों को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि जी हां, महोदय। माननीय रक्षा मंत्री की ओर से टीडीएफ के तहत अलग-अलग वर्टिकल के रूप में डीप-टेक और अत्याधुनिक परियोजनाओं की पूर्ति के लिए 500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त अनुदान या कोष को मंजूरी दी गई है।