समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के खिलाफ पूरी दुनिया में चल रही यह लड़ाई पिछले कई दशकों में 'सबसे बड़ा अदृश्य युद्ध' है। उन्होंने कहा कि भारत सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर युद्धस्तर पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 से सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय व स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी निर्देशों का सेना, नौसेना और वायुसेना पूरा पालन कर रही हैं। एक देश के तौर पर इस संकट से हम युद्धस्तर पर निपट रहे हैं। सशस्त्र बल कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में देश का सहयोग कर रहे हैं।
इस सवाल पर कि क्या सेना के संचालन के स्तर पर कोरोना वायरस का असर पड़ा है, सिंह ने कहा कि वे (सैन्य बल) हर तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं और भारत की संप्रभुता की शत्रुओं से रक्षा करने के लिए हर स्थिति में सक्षम हैं।
जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास स्थिति का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत शत्रुओं के लांच पैड पर खुफिया सूचना आधारित लक्षित हमले कर उन पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको आश्वासन दे सकता हूं कि हर स्थिति में हम अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए तत्पर हैं।’
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘पिछले दो हफ्ते से जैसा आपने नियंत्रण रेखा के पास जानकारी जुटाई होगी, हम शत्रुओं के लांच पैड पर लक्षित खुफिया आधारित हमले के कारण भारी पड़ रहे हैं और भारतीय जमीन पर पैर रखने से पहले ही हम उनका खात्मा कर रहे हैं।’
बता दें कि भारतीय नौसेना के 26 सैनिक कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। ऐसे में सशस्त्र बलों पर महामारी के प्रभाव की आशंका के बीच उनका यह बयान आया है।
कोरोना वायरस महामारी से निपटने में रक्षा बलों की भूमिका पर रक्षा मंत्री ने कहा कि इससे लड़ने में सशस्त्र बलों की संचार, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, चिकित्सकीय सहयोग और इंजीनियरिंग में महारत का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रमुख रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से वेंटिलेटर, मास्क, पीपीई और अन्य उपकरण बनाने के निर्देश दिए हैं ताकि कमी की समस्या का समाधान किया जा सके।
सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस को रोकने के लिए सशस्त्र बल सैनिकों की आवाजाही कम करने, छुट्टियों पर पाबंदी लगाने और घर से काम करने जैसे उपाय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी श्रेणी के अधिकारियों के लिए आवश्यक है कि अगर वे बाहर से आते हैं तो उन्हें 14 दिनों के पृथक वास में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि जहाजों और पनडुब्बियों के लिए विशेष सावधानियां बरती जा रही हैं जहां सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना कठिन है। उन्होंने कहा कि सीमाओं और दूरवर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिक सुरक्षित हैं क्योंकि वे बीमारी के संभावित वाहकों से दूर बिल्कुल अलग-थलग हैं। सरकार वहां नए सैनिकों की तैनाती कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं होने के चिकित्सकीय प्रमाण हैं।