संसद के मानसून सत्र का गुरुवार को चौथा दिन है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ जारी गतिरोध पर राज्यसभा में बयान दिया। राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में दिए अपने बयान में कहा कि हम पूर्वी लद्दाख में चुनौती का सामना कर रहे हैं, हम मुद्दे का शांतिपूर्ण ढंग से हल करना चाहते हैं और हमारे सशस्त्र बल देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए डटकर खड़े हैं।
वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान और कड़ाई से निरीक्षण करना सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता का आधार है। हमारे सशस्त्र बलों ने इसका स्पष्ट रूप से पालन किया है, वहीं चीनी पक्ष द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है। चीन ने पिछले कई दशकों में सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी तैनाती क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा निर्माण संबंधी गतिविधियां कीं। इसके जबाव में हमारी सरकार ने भी बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का बजट बढ़ाया है, जो पहले से लगभग दोगुना हुआ है।
उन्होंने कहा कि मैं देशवासियों को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हमारे सभी सशस्त्र बल के जवानों का जोश एवं हौसला बुलंद है, हमारे जवान किसी भी संकट का सामना करने के लिए तैयार हैं। इस सदन से दिया गया, एकता व पूर्ण विश्वास का संदेश, पूरे देश और पूरे विश्व में गूंजेगा और हमारे जवान, जो कि चीनी सेनाओं से आंख से आंख मिलाकर अडिग खड़े हैं, उनमें एक नए मनोबल, ऊर्जा व उत्साह का संचार होगा।
जब सभापति ने राजनाथ को मास्क पहनने को कहा
उच्च सदन में चीन पर बयान की शुरुआत राजनाथ सिंह ने बिना मास्क पहने की। सभापति वेंकैया नायडू ने फौरन रक्षामंत्री को मास्क पहनने को कहा। राजनाथ सिंह ने मुस्कुराते हुए बगल में रखा मास्क पहन लिया तो विपक्षी सांसदों ने चुटकी लेनी शुरू कर दी। इस पर सभापति ने ऐतराज जताते हुए कहा, रक्षामंत्री मास्क पहनना भूल गए तो मैंने उन्हें याद दिला दिया। इसमें ऐसी कोई बड़ी बात नहीं है।