मनोहर परिकर के बयान में हताशा और निराशा दोनों थी।
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वायुसेना के परिवहन विमान एएन-32 को समुन्दर निगल गया या आसमान खा गया। बंगाल की खाड़ी में बड़े पैमाने पर चल रहे खोजी अभियान के पांचवें दिन रक्षा मंत्रालय से सामने अब यह सवाल खड़ा हो गया है। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर के इस मामले में मंगलवार को दिए बयान में हताशा और निराशा दोनों थी। परिकर ने कहा है कि अब तक मिले कोई भी सुराग से सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। विमान में सवार 29 लोगों के जिंदा बचने की उम्मीद धूमिल पड़ चुकी है।
आखिरी उम्मीद के तौर पर नेशनल इंनस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (आईआईओटी) के अति उन्नत समुद्री अनुसंधान जहाज सागर निधि को मॉरिशस से बुलाया गया है। परिकर ने इशारों में कहा कि पांच दिन के मशक्कत के बावजूद ऐसे किसी खास इलाके की पहचान भी नहीं की जा सकी है जहां विमान के होने की संभावना हो। ऐसे में सागर निधि जैसे गहरे समुन्दर में काम करने वाले जहाज का बहुत कारगर इस्तेमाल नहीं हो सकता। यह तभी कारगर है जब खास इलाके की पहचान की जा चुकी हो। परिकर के मुताबिक, इससे जुड़े सभी संभावनाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि गहरे समुन्दर से कुछ ध्वनि के संकेत मिले हैं जहां सारी ताकत केंद्रित की जा रही है। लेकिन निराशा की बात यह है कि एक तरह की ऐसी कई ध्वनियां हैं जो छद्म साबित हुई हैं। खोजी की इस मुहीम में सिंगल एंड मल्टी बीम इको साउंडर जैसे उन्नत तकनीकों से लैस लैब स्थापित की गई है। दुनिया की ऐसी कोई मौजूद तकनीक नहीं है जिसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा हो। परिकर ने कहा कि उड़ान वाले दिन समुन्दर के ऊपर मौसम काफी खराब था, लेकिन इससे संबंधित सभी जरूरतों का ख्याल रखा गया था।