कुर्सी सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट के काकपिट में तब्दील हो चुकी थी। हेड माऊंटेड ग्लास डोर के बंद होते ही हम टेक ऑफ के लिए तैयार थे। चंद सेकेंड में सुखोई ने रन वे पर अपनी स्पीड से टेक ऑफ करना शुरू किया। थोड़ी ही दूर में हमारा फाइटरजेट हवा में बातें कर रहा था। एक पायलट को आसमान में दिखाई देने वाला नजारा आंखों के सामने था।
ब्रह्मोस आगे लक्ष्य की तरफ बढ़ रही थी। हमारे फाइटरजेट और ध्वनि की गति से काफी तेज। बुल आई फाइट के लिए आगे बढ़ती ब्रह्मोस को देखना किसी रोमांच से कम नहीं था। समुद्र में बीचों-बीच आगे बढ़ा रहा युद्धपोत सामने था। जब तक युद्धपोत पर सवार दुश्मन के सैनिक कुछ समझ पाते, हमने देखी एक भयानक तबाही। पलक झपकते ही घातक ब्रह्मोस ने दुश्मन के युद्धपोत को विस्फोट से पैदा होने वाले धुएं के गुबार में बदल दिया।
ब्रह्मोस के चीफ जनरल मैनेजर प्रवीण पाठक ने बताया कि अब तक जितने भी परीक्षण हुए हैं, उसके नतीजे और सफलता के प्रतिशत ने ब्रह्मोस की लक्ष्य भेदने की क्षमता को स्थापित किया है। ऐसी घातक मिसाइल चीन के पास भी नहीं है। 300 किमी दूर दुश्मन के ठिकाने को भेद देने में महज 6-7 मिनट का समय लगाती है।
इतनी तेज गति से और मूविंग टारगेट को ध्वस्त करने में माहिर ब्रह्मोस को रेडार नहीं पकड़ पाते। यह मार्ग विचलन भी कर लेती है और रडार को चकमा देने में माहिर है। रक्षा विशेषज्ञों का भी कहना है कि परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम ब्रह्मोस किसी भी देश के सामरिक संतुलन को बिगाड़ने में सक्षम है।
भारतीय वायुसेना, नौसेना, भारतीय सेना में शामित ब्रह्मोस से चीन भी चमकता है, पाकिस्तान के चेहरे पर शिकन रहती है। हालांकि भारत की यह तैयारी केवल आत्म रक्षार्थ है।