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पढ़ें, कैसे सुखोई-30MKI फाइटरजेट में लगी ब्रह्मोस मिसाइल ने मात्र छह मिनट में तबाह किया युद्धपोत

Sat, 08 Feb 2020 02:06 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, लखनऊ से लौटकर
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Sukhoi MKI Brahmos - फोटो : brahmos
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भारत और रूस के सहयोग से बनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल की घातकता का अंदाजा ऐसे लगाना मुश्किल है, लेकिन वर्चुअल दुनिया में इससे परिचित होने का अनुभव अनूठा रहा। ब्रह्मोस के महानिदेशक, उच्चस्तरीय वैज्ञानिक डा. सुधीर मिश्रा और चीफ जनरल मैनेजर प्रवीण पाठक ने इसका अहसास कराया। सूचना तकनीक के दौर में तैयार वर्चुअल वर्ल्ड में ले गए।

हम सुखोई-30MKI के कॉकपिट में

कुर्सी सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट के काकपिट में तब्दील हो चुकी थी। हेड माऊंटेड ग्लास डोर के बंद होते ही हम टेक ऑफ के लिए तैयार थे। चंद सेकेंड में सुखोई ने रन वे पर अपनी स्पीड से टेक ऑफ करना शुरू किया। थोड़ी ही दूर में हमारा फाइटरजेट हवा में बातें कर रहा था। एक पायलट को आसमान में दिखाई देने वाला नजारा आंखों के सामने था।

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दांयी तरफ पहाड़, नदी, बायीं तरफ की अलग दुनिया दिखाई दे रही थी। कहीं भी ऐसा अहसास नहीं कि हम वर्चुअल दुनिया में हैं। ऊपर एक सुखोई उड़ता दिखाई दिया, ब्रह्मोस सुपरसोनिक से लैस। हमें बताया गया कि यह आपका फाइटर जेट है, जिसे आप उड़ा रहे हैं।

बस इसमें देखकर अनुभव कीजिए कि कैसे मिसाइल दुश्मन के ठिकाने को हिट करती है। फाइटर पाइलट (मैं) ने जद में युद्धपोत देखा। मिसाइल लांच करने के लिए स्विच ऑन किया। चंद सेकेंड में लॉक, हुक ओपन हुए। फाइटर जेट में तैनात मिसाइल नीचे आई और दुश्मन के युद्धपोत की तरफ बढ़ चली।

छह मिनट में तबाह कर दिया दुश्मन का युद्धपोत

ब्रह्मोस आगे लक्ष्य की तरफ बढ़ रही थी। हमारे फाइटरजेट और ध्वनि की गति से काफी तेज। बुल आई फाइट के लिए आगे बढ़ती ब्रह्मोस को देखना किसी रोमांच से कम नहीं था। समुद्र में बीचों-बीच आगे बढ़ा रहा युद्धपोत सामने था। जब तक युद्धपोत पर सवार दुश्मन के सैनिक कुछ समझ पाते, हमने देखी एक भयानक तबाही। पलक झपकते ही घातक ब्रह्मोस ने दुश्मन के युद्धपोत को विस्फोट से पैदा होने वाले धुएं के गुबार में बदल दिया।

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दुश्मन का जहाज पूरी तरह से नेस्तनाबूत हो चुका था। हम उसके मलबे को समुद्र में डुबते देख रहे थे। चेहरे पर विजयी मुस्कान तैर रही थी। समुद्र की हिलोरें लेती लहरों के ऊपर उड़ान भरते हुए एक फाइटर पायलट जैसी स्वप्न सरीखी तमन्ना आकार ले रही थी। बार-बार मन में यह भाव उमड़ रहे थे कि काश मैं भी एक फाइटर पायलट होता। सुखोई पर सवार होता और ब्रह्मोस से किसी दुश्मन के विध्वंसक, फ्रिगेट या युद्धपोत को ऐसे ही तबाह कर देने का अवसर मिलता।

300 किमी की दूरी 6-7 मिनट में तय

ब्रह्मोस के चीफ जनरल मैनेजर प्रवीण पाठक ने बताया कि अब तक जितने भी परीक्षण हुए हैं, उसके नतीजे और सफलता के प्रतिशत ने ब्रह्मोस की लक्ष्य भेदने की क्षमता को स्थापित किया है। ऐसी घातक मिसाइल चीन के पास भी नहीं है। 300 किमी दूर दुश्मन के ठिकाने को भेद देने में महज 6-7 मिनट का समय लगाती है।

इतनी तेज गति से और मूविंग टारगेट को ध्वस्त करने में माहिर ब्रह्मोस को रेडार नहीं पकड़ पाते। यह मार्ग विचलन भी कर लेती है और रडार को चकमा देने में माहिर है। रक्षा विशेषज्ञों का भी कहना है कि परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम ब्रह्मोस किसी भी देश के सामरिक संतुलन को बिगाड़ने में सक्षम है।

भारतीय वायुसेना, नौसेना, भारतीय सेना में शामित ब्रह्मोस से चीन भी चमकता है, पाकिस्तान के चेहरे पर शिकन रहती है। हालांकि भारत की यह तैयारी केवल आत्म रक्षार्थ है।

 

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