रक्षा बजट 2022: मेक इन इंडिया के साथ मेक फॉर द वर्ल्ड की ओर रक्षा क्षेत्र, रक्षा संबंधी निर्माण व खरीद का 68 प्रतिशत देसी व निजी कंपनियों के जरिए सुनिश्चित
देशी उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षिक संस्थानों के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) का दरवाजा खोलते हुए इस एवज में आरएंडडी के आवंटित बजट का 25 फिसदी खर्च करने का फैसला किया गया है।
इस साल का रक्षा बजट रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में घोषणा की है कि रक्षा संबंधी निर्माण या खरीद का 68 प्रतिशत देसी कंपनियों के जरिए ही किया जाएगा। इतना ही नहीं सरकार ने रक्षा उपकरणों के आधारभूत डिजाइन बनाने और उसे विकसित करने में निजी क्षेत्र को बढावा देने के लिए भी बड़ा एलान किया है। सरकार ने संदेश दिया है कि सिर्फ मेक इन इंडिया ही नहीं अब मेक फॉर द वर्ल्ड की योजना के काम कर रही है।
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इसके लिए देशी उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षिक संस्थानों के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) का दरवाजा खोलते हुए इस एवज में आरएंडडी के आवंटित बजट का 25 फिसदी खर्च करने का फैसला किया गया है। अब संबंधित निजी संस्थानें डीआरडीओ के साथ साझेदार की तरह काम कर सकती हैं। काम में तेजी लाने और अफसरशाही अड़चनों से बचाने के लिए इस पूरी योजना को विशेष उद्देश्य वाहन (एसपीवी) मॉडल के तहत लाया जाएगा।
हालांकि इस बार के रक्षा बजट में पिछले साल के मुकाबले 4.6 प्रतिशत की मामूली बढोत्तरी ही की गई है। 2021-22 के लिए यह बढोत्तरी 2019-20 के मुकाबले छह प्रतिशत थी। 2022-23 के लिए रक्षा क्षेत्र को कुल 5.25 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
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बजट पेश करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में आयात कम से कम करने को प्रतिबद्ध है। सरकार रक्षा उपकरणों में देशी कंपनियों और निजी क्षेत्र को बढावा देकर पूरे रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।