चीन पाकिस्तान से लगातार खतरा बढ़ रहा है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर जरनल अशोक मेहता (रिटायर) का कहना है कि
जम्मू-कश्मीर से लगती पाकिस्तान सीमा पर लगातार स्थिति तनाव पूर्ण बनी है। चीन सीमा पर दोकलम में भी स्थिति नाजुक है, लेकिन सैन्य आधुनिकीकरण पर कोई बात नहीं करता। मेहता के अनुसार रक्षा बजट भी आम बजट 2018-19 में कहने के लिए बढ़ गया है, लेकिन इससे आप कोई नई योजना नहीं शुरू कर सकते। मेजर जनरल का कहना है कि विकास को लेकर सब बात कर रहे हैं लेकिन रक्षा में सुधार पर कोई फोकस नहीं दिखाई देता।
मेजर जनरल ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री रक्षा उत्पादन कॉरिडोर समेत अन्य की बात कर रही हैं। वह कर्नाटक से तमिलनाडु को जोड़ने की बात कर रही हैं, लेकिन चीन और पाकिस्तान के फ्रंट पर खड़ी चुनौती, सैन्य आधुनिकीकरण, रक्षा बजट, सैन्य खर्च पर वह भी मौन हैं।
अपर्याप्त है बजट
वायुसेना की क्षमता 24 स्क्वॉड्रान पर आ गई है। शीर्ष स्तर की खामोशी देखकर रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ने कहा कि मुझे नहीं लगता कोई इसे लेकर बहुत गंभीर है। कुछ साल पहले हम देश के रक्षा बजट को जीडीपा का 2.5 प्रतिशत तक ले जाने की बात कर रहे थे। यह भावी चुनौतियों को देखकर था। तब से अब तक रक्षा चुनौतियां और खतरे दोनों लगातार बढ़ रहे हैं। जीडीपी भी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, लेकिन केन्द्र सरकार जीडीपी की दर के हिसाब से रक्षा बजट के आवंटन को घटा रही है। कुल जीडीपी का रक्षा बजट को 1.57 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। जबकि 2013-14 में जीडीपी के मुकाबले रक्षा खर्च 1.79 प्रतिशत था।
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