यह मामला 26 अप्रैल, 2012 को नई दिल्ली में स्वामी की प्रेस वार्ता से संबंधित है, जिसके दौरान उन्होंने कथित तौर पर 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन और एयरसेल-मैक्सिस सौदे में कथित अनियमितताओं पर टिप्पणी की थी।
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया। मद्रास उच्च न्यायालय ने एक कंपनी को सिंगापुर उच्च न्यायालय के समक्ष सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने स्वामी द्वारा दायर अपील पर एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया। मामले को अब छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए रखा गया है।
विज्ञापन
स्वामी ने मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 18 अप्रैल के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है। मद्रास उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने 2014 में कंपनी के खिलाफ दिए गए अंतरिम निषेधाज्ञा को रद्द कर दिया था।
यह मामला 26 अप्रैल, 2012 को नई दिल्ली में स्वामी की प्रेस वार्ता से संबंधित है, जिसके दौरान उन्होंने कथित तौर पर 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन और एयरसेल-मैक्सिस सौदे में कथित अनियमितताओं पर टिप्पणी की थी। एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड ने आरोपों पर आपत्ति जताई थी और उन्हें कानूनी नोटिस जारी किया था। बाद में, इसी नाम की इसकी सिंगापुर सहायक कंपनी ने सिंगापुर उच्च न्यायालय में मानहानि की कार्यवाही शुरू की थी।
विज्ञापन
स्वामी ने शीर्ष अदालत में अदालत की अवमानना की याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि शीर्ष अदालत में 2-जी से संबंधित मामले दायर करने के लिए उन्हें अदालतों में नहीं घसीटा जा सकता है। यह याचिका 10 सितंबर 2013 को खारिज कर दी गई थी।
गौरतलब है कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार दूरसंचार कंपनियों को 122 2-जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के आवंटन में 1.76 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान से जुड़े एक बड़े घोटाले से हिल गई थी। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने पुरानी कीमतों पर और लाभदायक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया का पालन किए बिना लाइसेंस आवंटित करने के लिए सरकार की खिंचाई की थी।
हालांकि, तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी सहित मामले के सभी आरोपियों को दिसंबर 2017 में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने बरी कर दिया था। अदालत के फैसले में कहा गया था कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे उनके खिलाफ आरोपों को साबित करने में विफल रहा।