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कभी प्रधानमंत्री के साथ फोटो खिंचवा चुके दीप सिद्धू और लक्खा सिधाना रडार पर, लेकिन इन सवालों का क्या होगा?

Wed, 27 Jan 2021 11:03 AM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • पोल पर चढ़े युवक को दीप ने ही पकड़ाया था झंडा
  • यह तो प्रतीकात्मक विरोध था, सांप्रदायिक रंग न दें- सिद्धू
  • एनआईए कस सकती है सिद्धू पर शिकंजा
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deep sidhu and lakha sidhana - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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गणतंत्र दिवस के दिन लाल किला की प्राचीर पर किसान संगठन और निशान साहिब का झंडा फहराने वाले अभिनेता दीप सिद्धू के साथ साथ लक्खा सिधाना का नाम भी सुर्खियों में है। दीप सिद्धू ने न केवल झंडा फहराया, बल्कि मंच पर काबिज हुए, नारा भी लगाया और इससे पहले ट्रैक्टर रैली को रिंग रोड की तरफ मोड़ने में भी उनकी ही भूमिका सामने आ रही है। ये वही दीप सिद्धू हैं जिनकी भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेता सनी देओल और प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। एक तस्वीर में वह केंद्रीय मंत्री अमित शाह के साथ नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस सांसद, गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने भी मढ़ा सिद्धू पर आरोप

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने अमर उजाला को बताया कि किसानों के आंदोलन को भटकाने वाले दीप सिद्धू ही हैं। दीप सिद्धू को किसान संगठनों ने पहले ही अपने आंदोलन से अलग कर रखा है। किसान नेता राजेवाल ने भी आरोपों का ठीकरा सिद्धू के मत्थे मढ़ा। किसान नेता हरमीत सिंह कादियान का भी कहना है कि किसान आंदोलन को किसी के ईशारे पर भटकाया गया। भाकियू नेता राकेश टिकैत मंगलवार से ही कह रहे हैं कि किसानों के आंदोलन को बदनाम करने वाले चिन्हित किए जा चुके हैं।

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भारतीय किसान यूनियन (असली, अराजनैतिक) के प्रमुख चौधरी हरपाल सिंह ने अमर उजाला से कहा कि सुबह 10.30 बजे के करीब हमारे कुछ किसान रास्ता भटक कर फ्लाईओवर पर चढ़ गए थे। ये किसान अक्षरधाम मंदिर के पास तक पहुंच गए थे, लेकिन बाद में हमने बुलाया और हमारी ट्रैक्टर परेड दिल्ली पुलिस से तय शर्तों के अनुसार ही निकली है। किसान नेता योगेन्द्र यादव लगातार कह रहे हैं कि उन्होंने कई बार दीप सिद्धू को किसानों के आंदोलन से दूर रहने के लिए कहा था। सभी किसान नेताओं का कहना है कि केन्द्र सरकार को किसान आंदोलन को बदलानम करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

दीप सिद्धू भी आए सामने

दीप सिद्धू का फेसबुक के माध्यम से एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में दीप सिद्धू कह रहे हैं कि किसान आंदोलन को सांप्रदायिक रंग देकर कट्टरपंथियों द्वारा बदनाम किया जा रहा है। दीप सिद्धू ने कहा कि प्रतीकात्मक विरोध के रूप में उन्होंने निशान साहिब और किसान संगठन का झंडा लहराया था। उन्होंने किसान एकता मंच जिंदाबाद का नारा भी लगाया था। दीप सिद्धू ने सफाई में जारी वीडियो में कहा कि तिरंगा झंडा पहले से लहरा रहा था और इस दौरान उसका कोई अपमान नहीं किया गया। सिद्धू कहते हैं कि जब लोगों के वास्तविक अधिकारों को नजरअंदाज किया जाता है तो इस तरह के जन आंदोलन में लोगों का गुस्सा भड़क उठता है। आज की स्थिति में भी वह गुस्सा भड़क गया। निशान साहिब के झंडे को भी उन्हें प्रेम और सर्व धर्म सद्भाव का प्रतीक बताया।

लेकिन इन सवालों का जवाब कौन देगा? मंत्रालय के माथे पर चिंता

  • गणतंत्र दिवस जैसे संवेदनशील समय पर जब पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकी संगठन, देश के अराजक तत्व हमले की फिराक में रहते हैं तो सुरक्षा व्यवस्था इतनी लचर क्यों साबित हुई?
  • गणतंत्र दिवस से पहले किसान संगठनों के ट्रैक्टर मार्च को लेकर खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने चेताया था, पाकिस्तान से 300 ट्विटर हैंडल्स के संचालित होने की सूचना थी। राष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे प्रमुखता दी थी। इसके बाद भी सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता क्यों नहीं साबित हो सके?
  • संसाधन, संचार के तकनीकी युग में हर पुलिस अधिकारी के पास मोबाइल फोन, वायरलेस जैसी तमाम सुविधाएं हैं। गाजीपुर, टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर से मुबारका चौक, आईएसबीटी, लाल किला, आईटीओ की अच्छी खासी (10 किमी से अधिक) की दूरी है। इसके बावजूद ट्रैक्टर पर सवार आक्रामक किसानों की संख्या, उनके मूवमेंट को लेकर समय रहते सतर्कता क्यों नहीं बरती जा सकी। जबकि गणतंत्र दिवस की सुरक्षा तैयारियों का जिम्मा दिल्ली पुलिस के पास रहता है और केंद्रीय अर्ध सैनिक बल, सैन्य बलों का भी एक दस्ता आपात स्थिति के लिए तैयार रहता है?
  • सूत्र बताते हैं कि इसे लेकर केन्द्रीय गृह मंत्रालय बुधवार 27 जनवरी को स्थिति की समीक्षा करेगा। उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन भी किया जा सकता है। केन्द्रीय गृहमंत्री और प्रधानमंत्री इस घटना से काफी दुखी हैं। केन्द्र सरकार के एक अफसर का कहना है कि राष्ट्रपति द्वारा आयोजित रिसेप्शन में भी इस घटना के प्रति गुस्सा साफ देखा जा सकता था।
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