मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए 25 से 30 लाख रुपये सालाना फीस वसूले जाने को बहुत ज्यादा बताया। साथ ही तमिलनाडु के डीम्ड विश्वविद्यालयों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की फीस तय करने वाली समिति का निर्णय आने तक अंतरिम तौर पर 13 लाख रुपये सालाना फीस लेने के निर्देश जारी किए।
चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने ये निर्देश जवाहरलाल शानमुगाम की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए, जिसने इन संस्थानों पर बहुत ज्यादा ट्यूशन फीस वसूलने का आरोप लगाते हुए अपनी याचिका में एक तालिका बनाकर फीस का ब्योरा दिया था। बता दें कि यूजीसी ने पूरे देश के डीम्ड विश्वविद्यालयों का फीस ढांचा सही करने के लिए 30 जून तक कमेटी गठित करने का वादा किया है।
पीठ ने यूजीसी की शुल्क निर्धारण समिति को सभी पक्षों की बात सुनने के बाद 6 सप्ताह के अंदर अपनी सिफारिशें देने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि शुल्क समिति की तरफ से पहले मैनेजमेंट कोटा सीटों के लिए 11.5 लाख रुपये सालाना की फीस तय करने की बात पीठ के संज्ञान में आई है। ऐसे में विश्वविद्यालय इस शर्त पर 13 लाख रुपये शुल्क लेते हुए प्रवेश कर सकते हैं कि बाद में तय शुल्क इससे कम होने पर वे बाकी पैसा छात्रों को लौटा देंगे।