केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को कहा कि समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ-साथ सकारात्मक दृष्टिकोण और मानसिक ढांचा एक स्वस्थ और प्रगतिशील राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण निर्माण खंड हैं। मंडाविया केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के वरिष्ठ प्रशासनिक चिकित्सा अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार भी मौजूद थे।
सीजीएस अधिकारियों के लिए पारस्परिक संचार, प्रशासन और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में उनके कौशल को बढ़ाने और उन्नत करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संस्थान (एनआईएचएफडब्ल्यू) में एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
सीजीएचएस एक स्वास्थ्य योजना है जो अपने उन करीब 41.2 लाख लाभार्थियों को व्यापक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करती है, जो मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी हैं, इसके 460 वेलनेस सेंटर देशभर में 75 शहरों में फैले हुए हैं।
घर से बाहर निकलते ही बदलें रवैया
इस मौके पर मंडाविया ने कहा, "आइए हम काम के लिए अपने घरों से बाहर निकलते ही अपना रवैया बदलें। एक सकारात्मक दृष्टिकोण और स्वस्थ मानसिक ढांचा, समपर्ण और प्रतिबद्धता के साथ एक स्वस्थ और प्रगतिशील राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण निर्माण खंड हैं।"
मंडाविया ने पारस्परिक संचार और शिकायत निवारण के लिए एक मजबूत उपकरण के रूप में 'संवाद' के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "जो संगठन और व्यक्ति सीखने की स्थिति में हैं वे हमेशा प्रगति करेंगे। हमें हमेशा 'विद्यार्थी भाव' से लाभ होगा।
सकारात्मक दृष्टिकोण से होगा चुनौतियों का समाधान
उन्होंने आगे कहा, "सहानुभूति, देखभाल और कौशल हमारी तकनीकी और नैदानिक क्षमताओं को और बढ़ाते हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण से कई चुनौतियों का समाधान किया जाता है।"
पवार ने कहा कि एक संगठन के रूप में सीजीएचएस ने अपने नेटवर्क का विस्तार किया है और अब यह देशभर के 75 शहरों में लगभग 450 वेलनेस सेंटरों के साथ काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इस अवधि में स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास के साथ तालमेल रखने के लिए इसमें कई बदलाव हुए हैं जैसे सेवाओं का डिजिटलीकरण और विभिन्न नए स्वास्थ्य तौर-तरीकों को शामिल करना।
उन्होंने कहा कि इन परिवर्तनों की योजना और कार्यान्वयन पूरे कार्यबल के लगातार प्रयासों और कड़ी मेहनत के कारण ही संभव हो पाया है।