वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मुम्बई में एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कर्ज वसूली के उपायों पर चर्चा की। जेटली ने कहा की अगर कर्ज वसूली ट्रिब्यूनल (डीआरटी) की बात करें तो यह लंबी अदालती प्रक्रिया है। इसलिए ट्रिब्यूनल को सरल करना बहुत जरूरी है। जिससे फंसे कर्जे को तेजी से निकाला जा सके। वित्तमंत्री ने आगे कहा कि बड़े-बड़े बिल्डर अपना लोन लिया हुआ पैसा बैंकों को जमा करें, अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो सरकार उनकी कोई मदद नहीं करेगी। दिवालिया होने की सूरत में बैंकों को कर्ज लिया हुआ पैसा हर हाल में लौटाना होगा।
Eventually the Debt Recovery Tribunal was somewhat faster but not as effective as envisaged: Finance Minister Arun Jaitley pic.twitter.com/0eKdoSPSUV
— ANI (@ANI) August 19, 2017
मुंबई में अरुण जेटली ने ‘दिवाला और दिवालियापन : बदलते प्रतिमान’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ऋण वसूली संबंधी ट्रिब्यूनल कुछ हद तक तो तेज था लेकिन जिस तरह की परिकल्पना इसको लेकर की गई यह उतना प्रभावी नहीं था।
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गौरतलब है कि यह एक दिवसीय सम्मेलन कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, नेशनल फाउंडेशन फॉर कॉरपोरेट गवर्नेंस (एनएफसीजी) और भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।
इस सम्मेलन में आरबीआई के गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल, सेबी के अध्यक्ष अजय त्यागी और आईबीबीआई के अध्यक्ष डॉ. एम.एस. साहू भी मौजूद थे।