दिल्ली सहित आसपास के इलाकों के लिए हरियाणा व राजस्थान की सीमा से शव जलाने की लकड़ी सप्लाई की जाती है। मार्च माह तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन अप्रैल में उत्तर भारत के कई राज्यों में लकड़ी का संकट पैदा हो गया है। हरियाणा में पिछले 27 साल से सामाजिक कार्यों में जुटे रोहतक के राम बाग श्मशान घाट के उपाध्यक्ष सुरेंद्र बतरा कहते हैं, अप्रैल माह से श्मशान घाटों पर बुरा हाल है। अब लकड़ी की खपत पांच छह गुना बढ़ गई है। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि श्मशान घाट में आने वाले शवों की संख्या कितनी होगी। जिन लोगों के शव शमशान घाट में पहुंचते हैं, उनमें से अधिकांश लोग कोरोना संक्रमित रहे हैं।
हैरानी की बात ये है कि हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में शव जलाने के लिए जहां से लकड़ी आती है, वहां किल्लत हो गई है। लकड़ी के सप्लायर अब दिल्ली में लकड़ी भेजने लगे हैं। बतौर सुरेंद्र बतरा, ज्यादातर सप्लायर दिल्ली को प्राथमिकता दे रहे हैं। वजह, दिल्ली में रेट कई गुना ज्यादा मिल रहा है। लकड़ी के सैकड़ों ट्रक दिल्ली की तरफ जा रहे हैं। प्रदेशों के ज्यादातर श्मशान घाटों में लकड़ी की भारी कमी हो गई है।
एक श्मशान घाट पर औसतन रोजाना एक ट्रक यानी लगभग 100 टन लकड़ी आ रही है। एक शव को जलाने में 9 या 10 मन अर्थात 360 किलो लकड़ी लग जाती है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में यह लकड़ी पांच सौ या छह सौ रुपये प्रति क्विंटल मिल जाती थी। अब दिल्ली में यह लकड़ी 1200 लेकर 1800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। आग की शुरुआत कैसे हो, अब ये भी संकट पैदा हो गया है। गांवों में तो गोबर के उपले काम आ जाते हैं। पराली भी काम आ जाती है। शहरों में आम और सेब की पैकिंग के इस्तेमाल की जाने वाली पेटियों का इस्तेमाल श्मशान घाटों पर किया जा रहा है। पचास रुपये में आम या सेब पैकिंग वाली एक पेटी मिलती है, जबकि एक शव जलाने में कई पेटियां लग जाती हैं।
शमशान घाट का संचालन करने वाली संस्थाएं ज्यादा दाम चुकाने को तैयार हैं, लेकिन सप्लायर बात ही नहीं कर रहे। वे एक ही बात कहते हैं कि लकड़ियां दिल्ली जा रही हैं। कई जगहों पर अब कपूर और घी डालकर आग जलाई जाती है। सुरेंद्र बतरा कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा बुरा वक्त कभी नहीं देखा। दिल्ली में श्मशान घाटों पर कई घंटे की वेटिंग चल रही है, ये सुनकर मन कांप जाता है। पहले शहर के एक सामान्य श्मशान घाट पर एक दिन में औसतन चार-पांच शव आते थे। अब वह संख्या बीस या पच्चीस तक पहुंच रही है। कोरोना की भयानक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।