कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने केरल को भी बहुत ज्यादा प्रभावित किया। दक्षिण भारत के जिन राज्यों में सबसे ज्यादा कोरोना से मौतें हुई, उनमें केरल भी शामिल है। एक अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक केरल में पांच मई से लेकर 12 मई के बीच कोरोना के 2,67,002 केस सामने आए जबकि 488 कोरोना मरीजों की मौत हो गई। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि यह वह सप्ताह था जब सरकार ने राज्य में पूर्ण लॉकडाउन का एलान किया था। इसके बाद 2 जून से 9 जून के बीच कोरोना के 1,08,165 नए मामले सामने आए और 1214 लोगों की मृत्यु हुई। इन आकंड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि केरल में कोरोना के नए मरीज तो घटे, लेकिन मौत की संख्या बढ़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में साप्ताहिक मौत का आंकड़ा 149 फीसदी तक बढ़ गया है। वहीं, कोरोना के संक्रिमत मामलों में 59 फीसदी की गिरावट आई है।
राज्य में 22 फीसदी घटी कोरोना की जांच
केरल में कोरोना के मामलों में कमी की वजह इसकी जांच में आई कमी को माना जा रहा है। अखबार के मुताबिक, 12 मई के बाद से केरल में पिछले सप्ताह कोरोना की जांच में 22 फीसदी की कमी देखी गई।
लॉकडाउन में केरल का एमजीआर 72 फीसदी पहुंचा
जीवन रक्षा प्रोजेक्ट के संयोजक मैसूर संजीव का कहना है कि यदि किसी राज्य या जिले में 28 दिनों का मूविंग ग्रोथ रेट (एमजीआर) 10 फीसदी से कम है तो उस क्षेत्र को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन केरल का एमजीआर 12 मई से 9 जून तक 72 फीसदी रहा। यह केरल के लिए चिंता का विषय है। इस 28 दिन की अवधि में केरल के अंदर 4,384 लोग कोरोना से मरे हैं। यह आंकड़ा राज्य में कोरोना की कुल मौत का तीन चौथाई है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इस दौरान केरल में पूर्ण लॉकडाउन लगा हुआ था।