27 घंटे की लंबी जद्दोजहद के बाद जिंदगी की जंग हार गया चार वर्षीय निखिल। हजारों लोगों की दुआएं, प्रशासनिक अमले का हुजूम तथा ग्रामीणों की जी तोड़ कोशिश भी उसे काल के क्रूर पंजों से नहीं बचा सकी।
बृहस्पतिवार को करीब पांच बजे निखिल बोर वेल में गिरा और शाम साढ़े छह बजे से शुरू हुआ रेस्क्यू आपरेशन शुक्रवार की शाम सात बजकर चालीस मिनट पर अंजाम तक पहुंचा।
जेसीबी मशीन से 51 फुट की गहराई तक की गई खुदाई के बाद आठ फुट चौड़ाई में ग्रामीणों ने गैंती फावड़े से सुरंग खोदी। इसके बाद करीब दो फुट पानी के अंदर से निखिल के शव को हाथ डालकर निकाला गया।
जिंदगी की संभावना में प्रशासन ने तत्काल उसे एंबुलेंस से मऊरानीपुर अस्पताल भेजा, जहां डाक्टरों ने बालक को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का अनुमान है कि बालक ने बोरवेल में गिरने के कुछ घंटे बाद ही दम तोड़ दिया था।
झांसी के ग्राम बरौठा में बृहस्पतिवार की शाम चार वर्षीय मासूम बच्चा खेत में बने बोर में जा गिरा था। इसकी सूचना पर क्षेत्र में सनसनी मच गई। मौके पर कई थानों की पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ प्रशासन व पुलिस के अधिकारी पहुंच गए।
थाना लहचूरा क्षेत्रांतर्गत ग्राम बरौठा निवासी प्रीतम पाल बृहस्पतिवार की शाम तकरीबन पांच बजे अपनी पत्नी वंदना के साथ खेत पर राई की फसल की कटाई कर रहा था। उसकी छह वर्षीय पुत्री मौसम व चार वर्षीय पुत्र निखिल पास में ही खेल रहे थे।
इसी दौरान निखिल खेत पर बने बोर में जा गिरा। गड्ढे में उसके चीखने की आवाज पास में खेल रही बहन मौसम ने सुनी। उसने तुरंत इसकी सूचना खेत में काम कर रहे माता-पिता को दी।
उन्होंने गड्ढे में झांककर देखा तो निखिल नीचे पानी में डूबा नजर आया। हालांकि, उसका सिर पानी से ऊपर था। घटना की सूचना पाकर आसपास के खेतों में काम कर रहे अन्य ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते घटना स्थल पर भारी संख्या में ग्रामीणों का जमावड़ा लग गया।
सूचना मिलने पर कई थानों की पुलिस, स्वास्थ्य विभाग व फायर ब्रिगेड के साथ पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। बोर के गड्ढे के समानांतर गड्ढा खोदने के लिए दो जेसीबी मशीनें भी मंगा ली गईं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गड्ढे में पाइप से ऑक्सीजन पहुंचाई। अंधेरा होने पर आनन-फानन में जेनरेटर लगाकर रोशनी की व्यवस्था की गई। मौके पर पहुंची भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि, इन सभी कोशिशों के बावजूद निखिल को बचाया नहीं जा सका।