मोदी सरकार में मंत्री विजय गोयल के एनजीओ को जमीन अलॉट करने के लिए दिल्ली विकास प्रधिकरण (डीडीए) ने ना केवल अपने नियमों में बदलाव किए बल्कि अपने लेआउट को चेंज करते हुए जमीन को मंजूरी दे दी। मामला सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री और डीडीए दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं।
बता दें कि जनवरी 2014 में राज्यसभा सांसद बने विजय गोयल, वैश्य अग्रवाल एजुकेशन सोसाइटी (वीएईएस) के उपाध्यक्ष भी हैं। विजय गोयल का एनजीओ एक स्कूल चलाता है और टॉय बैंक की स्थापना के लिए स्कूल के बगल की जमीन चाहता था।
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इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक साल 2014 में विजय गोयल के एनजीओ ने जब टॉय बैंक बनाने के लिए जमीन मांगी तो डीडीए ने उसे जरुरी फॉर्म भरने के निर्देश दिए थे। खबरों के मुताबिक एक साल तक यह मामला ठंडा पड़ा रहा। लेकिन एक साल बाद यानी जून 2015 में वैश्य अग्रवाल एजुकेशन सोसाइटी ने डीडीए को एक और लेटर लिखा। जिसके बाद डीडीए के एडिशनल डायरेक्टर (इंस्टीट्यूशनल लैंड) ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
अधिकारियों की आपत्तियों को किया दरकिनार
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक वैश्य अग्रवाल एजुकेशन सोसाइटी की फाइल पर काम कर रहे डीडीए अफसरों ने अक्टूबर 2015 में लिखा कि मंजूरी मिली हुई ऐसी कोई जमीन उपलब्ध नहीं है। अफसरों ने रिपोर्ट में लिखा कि दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के मुताबिक सुविधाओं से वंचित बच्चों के लिए टॉय बैंक कम प्लेइंग सेंटर जैसा यूजर का कोई आधार नहीं है।'' लेकिन बाद में डीडीए ने अपने ही अधिकारियों की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए डाकघर के लिए आवंटित जमीन के लेआउट प्लान को बदलकर सितंबर 2016 में नरेंद्र मोदी सरकार में खेल मंत्री विजय गोयल से जुड़े एनजीओ को दे दी।
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खबरों के मुताबिक डीडीए के लैंड डिस्ट्रीब्यूशन डिपार्टमेंट के तत्कालीन प्रिंसिपल कमिश्नर जेपी अग्रवाल ने अक्टूबर 2015 में ''सोसाइटी के मकसद और उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए'' इस प्रस्ताव को विचार के लिए मंजूरी दे दी थी। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि जमीन अलॉट करने के लिए टॉय बैंक किसी भी कैटेगरी में नहीं आता था इसलिए नियमों में बदलाव करते हुए उसे ''अनाथ और बाल केंद्र'' की कैटेगरी में डाल दिया गया और जमीन आवंटित कर दी गई।