पिछले शनिवार को एक शख्स के परिवार को बताया गया कि वह मर गया है, लेकिन उससे पहले वह इंडियन एक्सप्रेस को सितंबर 2016 से मैसेज भेज रहा था। उसने 8 महीने में टेलीग्राम और ऐप के जरिये अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के अंदर चल रहे 'खास' जीवन का खुलासा करते हुए कहा कि उसकी यात्रा केरल के पलक्कड़ से अफगानिस्तान के नंगारहर तक पहुंच गई है। उसकी बचपन से ही इच्छा थी कि उसकी मृत्यु खिलाफत के लिए हो।
कुरान और हदीस का सहारा लेकर अपने संदेश में उसने कहा कि बेस्टिन विन्सेन्ट ऊर्फ याहिया, अपने भाई बेक्सन और उनके परिवारों के साथ "खिलाफत" में शामिल हो गए थे। लेकिन पिछले साल मई में उसने IS का साथ छोड़ दिया था। उसने लिखा कि उसके स्थान का विवरण और उन लोगों की पहचान को नहीं बताया गया है जो उसके साथ थे।
26 साल के क्रिशचन जिन्होंने इस्लाम अपना लिया, उसने हाल ही में 22 अप्रैल को एक मैसेज में 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब' के बारे में लिखा कि 9 दिन पहले अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में बॉम्ब फेंका गया था। उसने हंसते हुए लिखा कि मुझे संदेह है कि इससे एक मक्खी भी प्रभावित हुई हो। यहिया ने लिखा कि जब बॉम्ब को गिराया गया तब वो वहां मौजूद नहीं था, लेकिन उसके भाई वहां चाय पी रहे थे जहां बॉम्ब गिराया था। 'एमओएबी' बॉम्ब शडल मे गिराया गया जो नंगेरहर की राजधानी जलालाबाद से 35 किलोमीटर दूर है।
हालांकि, दो दिन पहले केरल के एक कार्यकर्ता के द्वारा सूचित किया गया कि केरला के 21 लोगों ने पिछले साल इस्लामिक स्टेट को छोड़ दिया था। बता दें कि यूएस बम विस्फोटों में याहिया की हत्या हो गई थी। जबकि याहिया के 55 वर्षीय पिता विन्सेन्ट फ्रांसिस अभी भी अपने बेटे के अंतिम शब्द की प्रतीक्षा कर रहे हैं।