दाऊदी बोहरा मुस्लिम महिला संगठन ने समुदाय में महिला परिशुद्ध करण (खफ्ज) की परंपरा की तरफदारी करते हुए इसे खतने की प्रक्रिया से अलग बताया है।
आस्ट्रेलिया की एक अदालत से तीन लोगों को महिला का खतना करने का दोषी करार दिए जाने के मामले के आलोक में दाउदी बोहरा वीमेंस एसोसिएशन फॉर रिलीजियस फ्रीडम (डीबीडब्लूआरएफ) ने बयान जारी किया कि खफ्ज का खतना से कोई लेना-देना नहीं है। खतना पर प्रतिबंध लगना चाहिए लेकिन खफ्ज को बरकरार रखा जाना चाहिए।
संस्था की सचिव और प्रवक्त कंचवाला ने कहा खफ्ज की प्रक्रिया महिलाओं के लिए जरा भी तकलीफदेह नहीं है। आस्ट्रेलिया कोर्ट ने भी स्त्रीरोग विशेषज्ञ प्रोफेसर ग्रोवर और बाल चिकित्सक डा. जेनिफरस्मिथ के प्रस्तुत साक्ष्य को माना कि पीड़िताओं के साथ खतना जैसी कोई क्रिया अंजाम नहीं दी गई।
मालूम रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने भी 30 जुलाई को कहा था कि महिलाओं सिर्फ अपने पति को खुश करने का साधन मात्र नहीं हैं। खतना पर रोक लगाए जाने संबंधी दाऊदी बोहरा समुदाय की महिलाओं के संगठन की याचिका पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 15 का हवाला देते हुए कहा था कि हर शख्स को अपने शरीर पर पूर्ण नियंत्रण का अधिकार है।