भारत और चीन दशकों पुराने सीमा विवाद के निपटारे केलिए रक्षा मंत्रियों की अगुवाई में एक और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता केलिए सहमत हुए हैं। गुरुवार को दोनों देशो के रक्षा मंत्रियों वेई फेंग और निर्मला सीतारमण की अगुवाई में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में सीमा पर शांति बहाली से संबंधी कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने हॉट लाइन गठित करने की राह में आ रही तकनीकी दिक्कतों पर भी बातचीत की।
गौरतलब है कि बीते साल हुए दोकलम विवाद और इसी साल वुहान में पीएम नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई अनौपचारिक बैठक के बाद रक्षा मंत्रियों की पहली बैठक थी। प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में सीमा विवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई और दोनों देशों ने सीमा पर तनाव घटाने पर सहमति दी। इसी तरह की एक अन्य बैठक चीन में भी करने पर सहमति बनी। यह बैठक संभवत: अक्टूबर महीने में होगी।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या रक्षामंत्री के दौरे के बावजूद भारत को चीन पर भरोसा करना चाहिए?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 4001 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 12.7 फीसदी (508 वोट) पाठकों ने माना कि रक्षामंत्री के दौरे के बावजूद भारत को चीन पर भरोसा करना चाहिए। जबकि 87.3 फीसदी (3493 वोट) पाठकों ने माना कि रक्षामंत्री के दौरे के बावजूद भारत को चीन पर भरोसा नहीं करना चाहिए।