Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार में पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि दावोस का विश्व आर्थिक मंच केवल नेताओं, निवेशकों और विचारकों के लिए है, स्थानीय बिल्डरों और ठेकेदारों से मिलने की जगह नहीं। उन्होंने कहा कि मंच का इस्तेमाल वैश्विक संवाद और राज्य के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए होना चाहिए। पढ़िए रिपोर्ट
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे ने सोमवार को कहा कि दावोस में होने वाला विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) नेताओं, निवेशकों और नए विचार देने वालों को एक साथ लाता है। उन्होंने कहा कि यह मंच अपने देश के बिल्डरों और ठेकेदारों से मिलने की जगह नहीं है, जो स्थानीय सरकारों से अनुमति मांगते हैं।
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आदित्य ठाकरे ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने दावोस जाने वाले मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे केवल उन लोगों से मिलने के 'बेकार तमाशे' में न उलझें, जो पहले से उनके संपर्क में हैं, बल्कि दुनिया से जुड़ें।
आदित्य ठाकरे ने क्या कहा?
आदित्य ठाकरे ने कहा कि विश्व आर्थिक मंच फोटो खिंचवाने या निवेश घोषणाओं की दौड़ का मंच नहीं है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दावोस में स्थानीय बिल्डरों और ठेकेदारों से मिलने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
ठाकरे के अनुसार, इस मंच का इस्तेमाल राज्य के एजेंडे को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समझौतों और बड़ी निवेश घोषणाओं का विचार अब प्रासंगिक नहीं रह गया है।
'डब्ल्यूईएफ का उद्देश्य वैश्विक संवाद'
उन्होंने कहा कि यह वार्षिक बैठक सार्वजनिक नेताओं, निवेशकों, विचारकों और वैज्ञानिकों को एक साथ लाती है, जहां भू-राजनीति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों से जुड़ती है। ऐसे मंच पर स्थानीय बिल्डरों और ठेकेदारों से मिलने में समय नहीं लगाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने डब्ल्यूईएफ के दौरान 30 लाख करोड़ रुपये के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनसे उद्योग, सेवा, कृषि और तकनीक जैसे क्षेत्रों में करीब 40 लाख नौकरियां पैदा हो सकती हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने पिछले हफ्ते दावोस से यह जानकारी दी थी।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि इस मंच का इस्तेमाल दुनिया से जुड़ने और राज्य के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल के नेता के तौर पर वह मुख्यमंत्री की आलोचना नहीं करेंगे, अगर दावोस से कोई स्थानीय या भारतीय समझौतों की घोषणा न हो, बशर्ते यह दौरा वैश्विक स्तर पर संवाद के जरिये राष्ट्रीय और राज्य हितों को आगे बढ़ाने में सच में उपयोगी हो।