फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

RSS: पश्चिम एशिया संकट से लेकर भारत-PAK संबंधों पर क्या है संघ का रुख?, दत्तात्रेय होसबाले ने दिए खुलकर जवाब

Tue, 12 May 2026 07:41 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, नई दिल्ली

सार

आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत-पाकिस्तान के बीच खेलों के आयोजन को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए एक खिड़की खुली रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन जारी रह सकते हैं।
विज्ञापन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने एक साक्षात्कार पश्चिम एशिया संघर्ष, भारत-पाकिस्तान संबंधों से लेकर विदेश नीति के मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। पश्चिम एशिया संघर्ष के बारे में पूछे जाने पर दत्तात्रेय होसबाले ने युद्ध को दुष्ट मानसिकता और अहंकारी राष्ट्रों के लालच का उत्पाद बताया।
विज्ञापन


दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष को तेल से जुड़ा हुआ है, न कि सभ्यतागत टकराव। होसबाले ने यह भी कहा कि पूरा ईसाई जगत एक देश के साथ नहीं है और न ही सभी मुस्लिम राष्ट्र एक छतरी के नीचे हैं।

पीएम मोदी की अपील पर क्या बोले होसबाले?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशहित में पेट्रोलियम उत्पादों के कम इस्तेमाल, सोने की खरीद को एक साल तक टालने और विदेश यात्राओं से बचने की अपील पर भी आरएसएस महासचिव ने अपनी राय रखी। होसबाले ने कहा कि यह देश के सर्वोत्तम हित में है। उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति न होने पर भी मितव्ययिता और सादगी भारतीय जीवन शैली का हिस्सा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे उपायों की घोषणा पहले भी की गई है।
विज्ञापन


पश्चिम एशिया संघर्ष में भारत की भूमिका पर कही ये बात
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर उन्होंने कहा कि भारत इसमें एक भूमिका निभा सकता है, क्योंकि पिछले एक दशक या उससे अधिक समय में विश्व मानचित्र पर भारत की स्थिति बदली है। उन्होंने कहा, "भारत को सुना जाता है, देखा जाता है, पहचाना जाता है और उसका सम्मान किया जाता है।" उन्होंने कहा कि इसी वजह से देशों, राष्ट्रों और नेताओं से भारत सही राह दिखाने में भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सकारात्मक बहस और संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

क्या विदेश नीति में है आरएसएस का दखल?
दत्तात्रेय होसबाले से से पूछा गया कि क्या आरएसएस भारत की विदेश नीति के लिए औपचारिक इनपुट देता है? इसके जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस सीधे तौर पर ऐसा नहीं करता है, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा अपनाई गई नीतियों में आरएसएस के दुनिया के देखने के नजरिए के तत्व शामिल हैं।

पाकिस्तान-भारत संबंधों पर भी बोले होसबाले
पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में होसबाले ने कहा कि हर तरह के प्रयास किए गए हैं और ऐसे प्रयास जारी रहने चाहिए। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के लाहौर बस यात्रा, पीएम मोदी के शपथ ग्रहण के समय पाकिस्तान को आमंत्रित करने और एक पाकिस्तानी नेता के परिवार की शादी में शामिल होने जैसी कोशिशों के बारे में बताया। 

उन्होंने कहा, ''अगर पाकिस्तान पुलवामा जैसी घटनाओं को अंजाम देकर चुभन पैदा करने की कोशिश करता है, तो हालात के अनुसार उचित जवाब देना होगा। देश की सुरक्षा और आत्म-सम्मान की रक्षा करना महत्वपूर्ण है।'' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, ''बातचीत के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए। राजनयिक संबंध, व्यापार और वाणिज्य जारी रहना चाहिए। वीजा दिए जाने चाहिए, क्योंकि बातचीत के लिए हमेशा एक खिड़की खुली रहनी चाहिए।'' उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच खेल आयोजनों के जारी रहने के बारे में पूछे जाने पर कहा, "बेशक, वे जारी रह सकते हैं।"

उदयनिधि के बयान पर साधा निशाना
आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबाले ने डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन पर निशाना साधते हुए सनातन धर्म की तुलना बरगद के पेड़ से की। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए कि वह इसे जड़ से उखाड़ना चाहते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि यह खत्म हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए कि मुझे लगता है कि प्रकाश नहीं होना चाहिए या मुझे लगता है कि परछाई नहीं होनी चाहिए, इसका मतलब यह नहीं है कि वे गायब हो जाएंगी। उन्होंने कहा, "सनातन इस राष्ट्र की आत्मा है। यह कोई धार्मिक प्रथा नहीं, बल्कि एक मूल्य और एक विश्वदृष्टि है।"

सनातन है बरगद का पेड़ :दत्तात्रेय होसबाले
होसबाले ने तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उदयनिधि के पहले भाषण के बारे में कहा, "यह उनकी राय है और लोगों ने चुनावों में इसका जवाब दिया है। लेकिन, किसी के कहने पर सनातन खत्म नहीं हो जाएगा।" उन्होंने कहा, "सनातन वह है जो शाश्वत रूप से विद्यमान है। शाश्वतता ही सनातन है। यह एक वृक्ष की तरह है, एक बरगद के वृक्ष की तरह। 100 या 200 साल बाद भी बरगद का वृक्ष वहीं खड़ा रहता है।"
विज्ञापन


अन्य वीडियो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें