प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने कन्या भ्रूण हत्या की घोर निंदा करते हुए फतवा जारी किया है। फतवे में कन्या भ्रूण हत्या को 'अवैध' और 'हराम' करार दिया गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक संस्थान के प्रवक्ता अशरफ उस्मानी ने बताया कि हाल ही में हुई जनगणना के बाद सामने आए नतीजों में भारी लिंगानुपात दिखाया बताया गया था। मुसलमानों में भी लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या घट रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ फतवा जारी किया गया है।
संस्थान से पूछा गया था कि क्या इस्लाम, कुरान या हदीथ में जन्म से पहले बच्चे के लिंग का पता लगाने या गर्भपात कराने की इजाजत देता है?
इस्लाम, कुरान और हदीथ में बच्चियों के प्रति माता-पिता की किस प्रकार की जिम्मेदारियां बताई गई हैं? क्या उनके लिए किसी तरह के दंड का प्रवधान है जो बेटियों संग गर्भ में या बाहर दुर्व्यहार करते हैं?
संस्थान के विभाग दारुल इफ्ता से बताया गया कि चार महीने के बाद गर्भपात कराना 'अवैध' और 'हराम' है।
सदियों पहले इंसान अपनी बच्चियों को जिंदा दफना देता था, जिसकी पवित्र कुरान ने सख्त निंदा की थी।
फतवे में कहा गया है कि इस्लाम बच्चियों को अच्छी परवरिश करने का आदेश देता है, और इस्लाम के मुताबिक लड़कियों को दुर्भाग्य बताने या उनका अनादर करने की कोई धारणा नहीं है। ''लड़कियां अल्लाह का वरदान होती हैं, इस्लाम उनकी कद्र करने को कहता है।''
दारुल उलूम के कुलाधिपति मौलाना अब्दुल कासिम नोमानी ने कहा कि ये कोई पहला फतवा नहीं हैं, इस संबंध में सैकड़ों फतवे जारी किए जा चुके हैं, उसी सीरीज में ये अगला फतवा है।