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पत्नी को कंधे पर 10 किमी तक ले जाने वाले मांझी ने किया नया खुलासा 

Sat, 27 Aug 2016 05:20 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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दाना मांझी
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ओडिशा के कालाहांडी में एक आदिवासी के सरकारी अस्पताल में पत्नी की मृत्यु के बाद शव ले जाने के लिए वाहन न मिलने के मामले में सिस्टम की खूब आलोचना हुई थ्‍ाी।
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जांच के आदेश दिए गए, विरोध-प्रदर्शन किए गए। लेकिन अब खुद दाना मांझी ने सामने आकर कहा है कि उसने किसी से मदद नहीं मांगी थी। 

उसने कहा कि उसकी हालत उस वक्त बहुत दयनीय थी और उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। मांझी ने बताया कि उसने खुद किसी से मदद नहीं मांगी थी। 
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पत्नी को चुपचाप लेकर अस्पताल से निकल गया था मांझी

दाना मांझी
साथ ही उसने अस्पताल प्रशासन में से किसी को भी सूचित नहीं किया था और अपनी पत्नी की लाश लेकर वह चुपचाप निकल पड़ा था। यहां तक कि उसने गांव तक पत्नी के शव को ले जाने के लिए भी किसी ग्रामीण से भी मदद नहीं मांगी थी।

मांझी ने कहा, डॉक्टर ने मेरी पत्नी का तीन बार इलाज किया था और वह अंतिम बार रात के 10 बजे विजिट करने आए थे। मेरी पत्नी की मौत सुबह 2 बजे हुई। जब मुझे पता चला कि अब वह जीवित नहीं बची है तो मैं बिना किसी को कुछ बताए शव को ले जाने लगा।

उस वक्त फीमेल वार्ड में कोई अटेंडेंट मौजूद नहीं था इसलिए मैंने खुद ही शव को घर तक कंधे पर ले जाने का फैसला किया। दरअसल इससे पूर्व मीडिया ‌में वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना को लेकर ओडिशा सरकार और अस्पताल प्रशासन की काफी थू-थू हुई थी।

यह मामला तब सामने आया था जब राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कुछ दिन पहले ही गरीबों के लिए सरकारी अस्पताल से शवों को घरों तक पहुंचाने के लिए मुफ्त की सरकारी सेवा 'महापरायण' की शुरुआत की थी। इससे भी लोगों में सरकार के रवैये को लेकर रोष था। हालांकि मांझी ने दिए अपने नए बयान से सारे मामले को पलट दिया है।
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