गुजरात में दलितों पर हुए अत्याचार का मुद्दा उठाने के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच होड़ लग गई। बुधवार को राज्यसभा में शून्य काल शुरु होते ही टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने गुजरात प्रकरण पर बोलना शुरु किया।
यह भांपते ही बसपा प्रमुख मायावती खड़ी हो कर इसी मुद्दे पर बोलना शुरु कर दीं। इन दोनों की प्रतिस्पर्धा चल ही रही थी कि कांग्रेस की ओर से सदन में विपक्ष के नेता (एलओपी) की ओर से बयान देने की पेशकश शुरु हो गई। राज्यसभा में दलित मुद्दे पर पहले बयान देने की सियासी मजबूरी ने मामला ऐसा उलझाया कि सदन चार बार स्थगित करनी पड़ी। आखिरकार उच्च सदन में कोई भी पार्टी इसपर बयान नहीं दे पाई।
हालांक भोजन अवकाश केबाद भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह के भद्दे बयान के बाद मायावती को बोलने का मौका जरुर मिल गया। लेकिन सुबह सदन की कार्यवाही शुरु होने के बाद प्रतिस्पर्धा के पहले राउंड में उपसभापति ने डेरेक और माया को छोड़ एलओपी गुलाम नबी आजाद को बोलने को कहा। इस पर डेरेक और मायावती ने कड़ी आपत्ति जताई।
शोर शराबे से नाराज उपसभापति पी जे कुरियन ने व्यवस्था के सवाल (प्वाइंट ऑफ आर्डर) के तहत आगे बढने को कहा। इसपर कांग्रेस और बसपा के सांसदों ने शोर शराबा शुरु कर दिया। सदन को दस मीनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
इसके बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरु होती तीनों पार्टियों केसांसद सभापति केआसन के पास आ कर दलित विरोधी सरकार और नरेंद्र मोदी शर्म करो के नारे लगाने लगते। इस क्रम में सदन तीन बार स्थगित करनी पड़ी। शून्य काल और प्रश्न काल नहीं हो सका। ना ही तीनों पार्टियों में से कोई भी बयान दे पाया।