देश के शहरी और ग्रामीण आबादी में मधुमेह रोगियों की संख्या और बीमारी के पहले की स्थिति उसके उपचार के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल पर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) विस्तृत अध्ययन कर रहा है।
पहले फेज में 15 राज्यों में अध्ययन का काम पूरा हो चुका है जबकि दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित चार राज्यों को शामिल करने की तैयारी है।
कार्यक्रम के तहत बीमारी के पहले की स्थिति वाले मरीजों के इलाज के अलग-अलग तरीकों पर भी अध्ययन करने की तैयारी चल रही है।
संबंधित व्यक्ति की मधुमेह की जांच के बाद बीमारी की आशंका वाले मरीज का एहतियातन परंपरागत तरीके से इलाज शुरू कर दिया जाता है। इन सभी प्रक्रिया में करीब आठ माह का समय लगता है। मंत्रालय और आईसीएमआर की योजना है कि इस अध्ययन को देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों तक पहुंचाया जाए।
तीन तरीके से इलाज पर होगा अध्ययन
जांच के बाद जिन लोगों में मधुमेह की आशंका दिखी वैसे मरीजों का तीन समूह बनाए जाएगा। एक समूह को योगा कराया जाएगा, दूसरे समूह में शामिल लोगों को व्यायाम के आम तौर-तरीकों का इस्तेमाल होगा और तीसरे समूह में शामिल लोगों को मेथी से तैयार पदार्थ खिलाया जाएगा।
इसके बाद तीनों समूह में शामिल लोगों पर तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। इससे पता लगाया जाएगा कि किस प्रक्रिया के इस्तेमाल से मरीज को सबसे ज्यादा लाभ हुआ।