आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में एक सब इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल को पुलिस स्टेशन में एक दलित युवक की पिटाई करने और उसे अपमानित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। मामला सीतानगरम पुलिस स्टेशन का है। घटना के बाद पीड़ित वेदुल्लापल्ली गांव के वारा प्रसाद को इलाज के लिए राजमुंदरी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पीड़ित प्रसाद ने बताया कि उनके क्षेत्र में किसी की मौत हो गई थी जिसके बाद उन्होंने और तीन अन्य लोगों ने उसी रास्ते से गुजरने वाले रेत के ट्रकों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी। उन्होंने चालकों से कुछ समय तक इंतजार करने के लिए कहा था जब तक कि अंतिम संस्कार के लिए शव को वहां से नहीं ले जाया जाता।
उन्होंने बताया कि इसके बाद वाईएसआर कांग्रेस के एक स्थानीय नेता और दो पुलिसकर्मी घर पर आए और इस पूरे मामले में बातचीत की। जिसके बाद वह हमें जांच के नाम पर पुलिस स्टेशन ले गए। प्रसाद का आरोप है कि थाने में एसआई ने उन्हें बेल्ट से बुरी तरह पीटा और उन्हें लात मारी। इसके बाद उन्होंने एक नाई को बुलवाया और उनके सिर का मुंडन और जबरन मूंछें कटवा दीं।
वहीं तेलगु देशम पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जंगल राज आ गया है। उन्होंने कहा कि यह सब वाईसीआरसी नेताओं के कहने पर हुआ है।
टीडीपी प्रमुख ने कहा कि यह घटना पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हई है। इस दौरान युवकों को पीटकर उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि राज्य में अवैध खनन का काम चल रहा है।
अधिकारी भ्रष्ट सत्ताधारी पार्टी के हाथों का खिलौना बने हुए हैं। वहीं स्थानीय दलित संगठनों के विरोध के बाद पुलिस उपाधीक्षक पीएसएन राव ने इस घटना की जांच के बाद सब इंस्पेक्टर फिरोज शाह और एक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है।
एलुरु रेंज के उप महानिरीक्षक केवी मोहन राव ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 324, 323 और 506 के तहत सब-इंस्पेक्टर और दो अन्य लोगों के खिलाफ एससीएसटी अत्याचार (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।