भारत का तापमान इस सदी के अंत तक दो डिग्री तक बढ़ जाएगा। गणितीय गणना पर आधारित मॉडल के आधार पर पृथ्वी विज्ञान के सचिव डॉक्टर माधवन नायर राजीवन ने यह दावा किया है। डॉ. राजीवन सीएसआईआर के समर रिर्सच ट्रेनिंग प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे।
विज्ञान और जलवायु परिवर्तन पर बोलते हुए डॉ. राजीवन ने कहा, भारत इन चुनौतियों से पार पाने के लिए तैयार है। हमारा अर्थ सिस्टम मॉडलिंग और जलवायु परिवर्तन के साथ तैयार है। हमारी गणना के मुताबिक लगातार जलवायु परिवर्तन से सतह पर वायु के तापमान और आर्द्रता का स्तर बढ़ेगा और गर्मी के मौसम की अवधि बढ़ेगी।
इसके परिणामस्वरूप अत्याधिक बारिश, तेज हवाओं, तीव्र उष्णकटिबंधीय चक्रवात संवहन में बढ़ोतरी देखने के लिए मिलेगी। इतना ही नहीं तूफान, मानसून में बदलाव भी होगा। इससे अधिक बाढ़ और सूखा के साथ साथ समुद्र के स्तर और तटीय क्षरण में भी इजाफा हो सकता है।
डॉ. राजीवन के मुताबिक जलवायु परिवर्तन भारत के बारिश पैटर्न को भी प्रभावित कर रहा है। पूरी दुनिया लगातार गर्म हो रही जलवायु की समस्या से जूझ रही है। लगातार हो रहे कार्बन उत्सर्जन के चलते आर्कटिक क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है। आर्कटिक समुद्र लगातार पिघल रहा है। इसमें 90 के दशक से खासी तेजी देखी गई है।