राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में कहा कि सरकार ने जुलाई में दलाई लामा की ओर से उनकी संस्था को लेकर दिया गया बयान देखा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी धर्म या आस्था से जुड़ी परंपराओं पर कोई पक्ष नहीं लेती। भारत सरकार का यही रुख चीन सरकार को भी बता दिया गया है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को कहा कि उसने जुलाई में 14वें दलाई लामा की ओर से दलाई लामा संस्था को लेकर दिया गया बयान देखा है और यह स्पष्ट किया है कि सरकार धर्म और आस्था से जुड़ी मान्यताओं और परंपराओं पर कोई पक्ष नहीं लेती। सरकार से संसद में इसको लेकर सवाल पूछा गया था।
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सरकार से पूछा गया था कि क्या यह सही है कि भारत सरकार ने दलाई लामा को अपनी उत्तराधिकार प्रक्रिया तय करने के अधिकार का खुलकर समर्थन किया है? इसके लिखित जवाब में विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा, भारत सरकार ने 14वें दलाई लामा का दो जुलाई 2025 को जारी वह बयान देखा है जो उनकी संस्था से जुड़ा है। भारत सरकार का रुख यह है कि वह किसी भी धर्म या आस्था से जुड़ी मान्यताओं और परंपराओं पर कोई पक्ष नहीं लेती।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने हमेशा देश में सभी लोगों के लिए धर्म की स्वतंत्रता को माना है और आगे भी इसका सम्मान करती रहेगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार का यह रुख चीन सरकार को भी बता दिया गया है। जुलाई में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के प्रमुख पेनपा शेरिंग ने चीन के उस दावे को खारिज किया था जिसमें कहा गया था कि अगला दलाई लामा चीन की सीमा के भीतर ही जन्म लेगा।
शेरिंग ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा था, चीनी सरकार कहती है कि ह अगले दलाई लामा को अपने देश की सीमा में ढूंढ़ेगी। लेकिन उनकी पवित्रता दलाई लामा खुद तय करेंगे कि उनका पुनर्जन्म कहां होगा। चीन की सरकार कैसे तय कर सकती है कि एक आध्यात्मिक व्यक्ति का पुनर्जन्म कहां होगा? यह बयान दलाई लामा के 90वें जन्मदिन के जश्न से पहले आया था।