1951 में चीन ने किया था तिब्बत पर कब्जा
बौद्ध धर्म के अनुयायियों की मानें तो वर्तमान लामा पहले के दलाई लामाओं के अवतार हैं यानी उन्हीं का पुनर्जन्म हुआ है। 1951 में चीन ने सैनिकों को भेजकर तिब्बत पर कब्जा कर लिया था। बेशक चीनी कब्जे के बाद तेनजिन ग्यात्सो को 14वें दलाई लामा के तौर पर पद पर बिठाया गया लेकिन उनका चुनाव 1937 में ही कर लिया गया था। उनके चुनाव से चीन बौखला गया और उसने उन्हें अपने यहां बिना किसी सुरक्षा गार्ड के आने का निमंत्रण दिया।
जवाहरलाल नेहरू ने दी थी शरण
तिब्बतियों ने जब इस निमंत्रण को स्वीकार नहीं किया तो उसने गोलीबारी का आदेश दे दिया। जिसके कारण पड़ोसी देश होने की वजह से केवल भारत की वहां राजनयिक पहुंच थी। तब 23 साल के दलाई लामा सेना की वर्दी पहनकर छिपते-छिपाते असम के रास्ते भारत आए थे। लामा 31 मार्च 1951 को भारत आए थे और तीन अप्रैल को भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उनके आने की घोषणा की थी। फिर उन्हें और उनके साथ आए लोगों को शरण देते हुए हिमाचल में रहने की इजाजत दी।