8 नवंबर को नोटबंदी के बाद से पूरे देश में लोग कैश के लिए परेशान हैं। इसी बीच नोएडा के जेजे सेक्टर से दिल को दहला देनी वाली खबर आई है।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, पेशे से दिहाड़ी मजदूर 65 साल के मुन्नी लाल मंगलवार की दोपहर एक अस्थायी तंबू के नीचे बैठे थे। उनके सामने उनकी पत्नी की लाश पड़ी थी और बगल में अगरबत्ती जल रही थी। सवाल पूछने पर बताया कि वह अपने बेटे का इंतजार कर रहे हैं।
मुन्नी लाल ने बताया कि सोमवार की दोपह उनकी 61 वर्षीय पत्नी फूलमति देवी का नोएडा के एक हॉस्पिटल में निधन हो गया। वह पिछले कई महीने से पेट के कैंसर से जूझ रही थीं।
उन्होंने बताया, 'सुबह 9 बजे वह अपनी पत्नी को लेकर धर्मशाला हॉस्पिटल पहुंचे, जहां से उसे एक दूसरे प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया। उन्होंने एक ऑटो किराए पर लिया और हॉस्पिटल पहुंचे। दोपहर दो बजे उसकी मौत हो गई। इस दौरान सीरिंज, खाना और दवाईयों में उसके 6 से 7 सौ रुपए खर्च हो गए।'
पत्नी की लाश लेकर वह सोमवार की ही शाम सेक्टर 9 स्थित अपने घर पहुंचे। उनके पास पत्नी की अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे। इसके बाद वह बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच गए, जहां उनके 30 वर्षीय बेटा का अकाउंट था।
दूसरे दिन भी ब्रांच में नहीं थे रुपए
नोटबंदी
मुन्नी लाल ने बताया, 'मेरे दो बेटे यूपी के गोंडा से घर पहुंचने के लिए ट्रेन पर बैठ गए थे। उनके एक बेटे के अकाउंट में 16 हजार रुपए थे। वह बैंक में घंटों खड़े रहे, लेकिन मैनेजर ने कहा कि ब्रांच में पैसे नहीं हैं। मैंने उन्हें अपनी स्थिति बताई, लेकिन किसी ने नहीं सुना।'
रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक के अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि ब्रांच में रुपए नहीं थे। उन्हें सोमवार को पैसे ही नहीं मिले। वह पैसे की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या कहते हैं एसपी
डेमो पिक
गौतम बुद्ध नगर के एसपी सिटी दिनेश यादव ने कहा कि ब्रांच में पैसे नहीं थे। इसे देखते हुए एक चौकी इंचार्ज ने उन्हें 25 सौ रुपए दिए। इसके बाद ब्रांच में पैसे की व्यवस्था की और वे 15 हजार रुपए निकाल सके।
बताते चलें कि मुन्नी लाल 22 साल पहले गोंडा से नोएडा आ गए थे। वह फल बेचने का काम करते हैं। पत्नी के बीमार पड़ने के बाद उन्होंने काम करना छोड़ दिया था।