पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी को याद करते हुए कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेता डी राजा ने कहा कि सोमनाथ दादा बेहद स्पष्टवादी व्यक्ति थे। पार्टी के अंदर भी, जिस बात से वे सहमत नहीं होते थे, सबके सामने स्पष्ट रुप से कह देते थे। उन्हें इस बात की भी कम ही परवाह हुआ करती थी कि कोई उनसे सहमत है या नहीं।
उन्होंने कहा कि साल 1996 में देवेगौड़ा को पीएम बनाने से पहले पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु को पीएम बनाने का प्रस्ताव आया था। पार्टी के कुछ शीर्ष नेता इससे सहमत नहीं थे, जिसके कारण इस प्रस्ताव को टाल दिया गया। लेकिन बाद में खुद ज्योति बसु ने पार्टी के इस फैसले को 'ऐतिहासिक गलती' बताया था। सोमनाथ दादा भी इस फैसले से सहमत नहीं थे। उन्होंने स्पष्ट रुप से इस बात को सबको बता दिया था।
डी राजा ने कहा कि कम्युनिष्ट पार्टी की तरफ से वह पहले स्पीकर बने थे। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में सभी दलों को पूरा सम्मान दिया, यही कारण है कि आज हर राजनीतिक दल उन्हें याद कर रहा है और उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट कर रहा है। डी राजा ने कहा कि मौजूदा समय में उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाए जाने की जरुरत है। वे सेक्युलर इंसान थे और हर विचारधारा को बराबर सम्मान देते थे।
लोकसभा में हर दल की विचारधारा को पर्याप्त समय देना उनकी कोशिश होती थी। उन्होंने देश के संविधान को हमेशा सबसे ऊपर रखा। उनकी इन्हीं खूबियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सबसे बेहतर सांसद का पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने कहा कि संसद में या उनके निवास पर, जब भी उनसे उनकी मुलाकात होती थी, एक सौम्य मुस्कराहट हमेशा उनके चेहरे पर तैरती रहती थी।