निजी क्षेत्र में महिलाओं के लिए कार्यस्थल को और सुरक्षित बनाने केलिए कंपनी को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। इसके लिए कॉर्पोरेट मंत्रालय ने कंपनियों के लिए बने लेखा नियम 2014 में संशोधन कर दिया है।
नए नियमों में निजी कंपनियों में महिला उत्पीड़न के मामले और कार्रवाई का खुलासा कंपनी को वार्षिक रिपोर्ट में करना होगा। ऐसा न करने पर कंपनियां दंड की भी भागी बनेगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने बताया कि अब तक निजी कंपनियां सजा के डर से ऐसे मामलों का खुलासा नहीं करती थीं।
निजी क्षेत्र में कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महिला एवं बाल मंत्रालय ने वाणिज्य मामलों के मंत्री से कार्यस्थल रोकथाम निषेध और निवारण अधिनियम के तहत प्रत्येक कंपनी की निदेशकों की रिपोर्ट में महिलाओं के यौन उत्पीडन के कार्यान्वयन के संबंध में खुलासा करने का अनुरोध किया था।
इस पर मंत्रालय ने 31जुलाई को अधिसूचना जारी कर दी है। मंत्रालय का दावा है कि कंपनियां पहले से ही कार्यस्थल रोकथाम निषेध और निवारण अधिनियम 2013 के तहत महिलाओं के यौन उत्पीडन के लिए आंतरिक शिकायत समिति के संविधान से संबंधित प्रावधानों का पालन कर रही थी।
यह नियम जल्द से जल्द सभी सूचीबद्ध कंपनियों की कॉर्पोरेट गवर्नेंस रिपोर्ट में आएं इसके लिए डब्ल्यू सीडी मंत्रालय सेबी से भी सहायता लेगा। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का दावा है कि वह सरकारी दफ्तरों में काम के वातावरण को महिलाओं के अनुकुल बनाने के लिए काम कर रहा है। इसमें केंद्र सरकार के तहत सभी मंत्रालयों विभागों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन कर दिया गया है।
कार्यस्थल पर यौन उत्पीडन के खिलाफ केंद्र सरकार में कार्यरत महिलाओं को तुरंत राहत प्रदान करने के लिए मंत्रालय के अनुरोध पर डीओपीटी द्वारा कई निर्देश जारी किए गए हैं। मंत्रालय ने इन महिलाओं को शी-बॉक्स के माध्यम से सीधे मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी दी है।