दाऊद इब्राहिम भारत में धार्मिक नेताओं, चर्चों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेताओं पर हमला कर सांप्रदायिक तनाव फैलाना चाहता था। ऐसा दावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने किया है।
सूत्रों की मानें तो डी-कंपनी के 10 सदस्यों को देश में मोदी सरकार बनने बाद तनाव पैदा करने और संघ नेताओं पर हमला करने का काम दिया गया था। एजेंसी शनिवार को इन 10 सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करेगी।
डी कंपनी के शूटरों ने साजिश के तहत 2 नवंबर 2015 को गुजरात में दो दक्षिणपंथी नेताओं शिरीष बंगाली और प्रग्नेश मिस्त्री की हत्या की थी। इस मामले में पुलिस के हत्थे चढ़े शूटर्स का दावा था कि इन हत्याओं को उन्होंने 1993 मुंबई ब्लास्ट के आरोपी याकूब मेमन की फांसी के बदले किया था।
वहीं एनआईए को जांच के दौरान पता चला कि इन हत्याओं के मास्टरमाइंड डी कंपनी के दो सदस्य जावेद चिकना और जाहिद मियां उर्फ 'जाओ' थे। उनकी योजना थी कि वे अन्य धार्मिक नेताओं और चर्चों पर हमला करें ताकि देश की स्थित तनावपूर्ण हो सके। इन लोगों ने भारतीय जनता पार्टी और संघ के नेताओं की एक हिटलिस्ट भी बनाई थी।
चार्जशीट से दाऊद को बाहर रखेगी एनआईए
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बता दें कि हाल ही में पाक में रह रहे चिकना को पकड़ने और भारत में लाने के लिए एनआईए ने इंटरपोल से मदद की दरकार की थी। इसके साथ ही भारत की ओर से पाक, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, दुबई और अमेरिका को न्यायिक प्रार्थना भी भेजी गई थी।
एनआईए ने अपनी सूची में जिन 10 लोगों का नाम शामिल किया है उसमें से 7 बीते साल पकड़ गए हैं, जिसमें निसान अहमद,अब्दुल सामद, आबिद पटेल, मोहम्मद अल्ताफ, हाजी पटेल, युनुस शेख और मोहसिन खान का नाम है।
आबिद के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो जावेद चिकना का भाई है जिसे गुजरात में की गई दो हत्याओं के लिए 50 लाख रुपए दिए गए थे। हालांकि एनआईए अपनी चार्जशीट से दाऊद को बाहर रखेगी लेकिन यदि उसके खिलाफ कोई सबूत पाया गया तो एजेंसी पूरक आरोपरत्र दाखिल करेगी।