हाल ही में बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवात दाना ने देश के कई राज्यों में भारी नुकसान पहुंचाया है। इस चक्रवात के चलते तटीय राज्य ओडिशा में बिजली के खंभों , इमारतों को काफी नुकसान पहुंचा है। जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। ओडिशा के भद्रक जिले के बासुदेवपुर खंड के कई गांवों में लोग अपने मोबाइल फोन की बैटरी चार्ज करने के लिए बिजली जनरेटर ले जाने वाले वाहनों के आगे कतार में खड़े नजर आ रहे हैं। चक्रवात 'दाना' के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है।
भद्रक जिले की बिष्णुपुर पंचायत की सरपंच शांतिलता पांडा ने बताया कि लोगों को एक मोबाइल फोन की बैटरी रिचार्ज करने के लिए 20 रुपये प्रति घंटा तथा घरों में पानी की टंकी में पानी भरने के लिए 300 रुपये देने पड़ रहे हैं। पांडा ने कहा कि स्थानीय टेंट हाउस और अन्य व्यापारी, जिनके पास पेट्रोल और डीजल से चलने वाले जनरेटर सेट हैं, वे इलाके के लोगों को सशुल्क सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
जिले के नुआगांव गांव के एक युवक बताया कि, मैंने अपना मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए 20 रुपये प्रति घंटे का भुगतान किया है। हम प्रशासन से जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने का अनुरोध करते हैं। ओडिशा में बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनी 'टाटा पावर' ने कहा कि लगभग 92 प्रतिशत प्रभावित क्षेत्रों में बिजली बहाल कर दी गई है तथा उसने पूर्ण बहाली में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त टीमें तैनात की हैं।
कंपनी ने एक बयान में कहा कि इंजीनियर, लाइनमैन और सहायक कर्मचारी सरकारी एजेंसियों एवं स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। शुक्रवार की सुबह पूर्वी तट पर भीषण चक्रवाती तूफान 'दाना' आया, जिससे मूसलाधार बारिश और तेज़ हवाएं चलीं, जिसके कारण पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए। इससे ओडिशा में बुनियादी ढांचे और फसलों को काफी नुकसान पहुचा।
चक्रवात दाना से ओडिशा में 35.95 लाख लोग प्रभावित
ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने रविवार को कहा कि चक्रवात दाना और उसके बाद 14 जिलों में आई बाढ़ के कारण ओडिशा में कुल 35.95 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। पुजारी ने बताया कि 8,10,896 लोगों को 6,210 चक्रवात राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक प्रभावित जिलों में केंद्रपाड़ा, बालासोर और भद्रक शामिल हैं। चक्रवात के कारण किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। निकाले गए लोगों को 1,178 चक्रवात राहत केंद्रों में आश्रय दिया गया तथा उन्हें भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।