Cyber Security: साइबर सुरक्षा फर्म एक्रोनिस की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट कार्ड और पासवर्ड जैसी निजी जानकारी के लिए साइबर अपराधी भी अब एआई का इस्तेमाल करने लगे हैं। जेनरेटिव एआई ने साइबर अपराधियों के लिए बाधाओं को कम कर दिया है।
भारत मैलवेयर हमलों के लिए सबसे ज्यादा निशाना बनाए जाने वाले देश के रूप में उभरा है। यह वैश्विक चार्ट में शीर्ष पर है। साइबर सुरक्षा फर्म एक्रोनिस की रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के कारण रैंसमवेयर हमलों में तेजी आई है। यह रिपोर्ट इस साल जनवरी से जून के बीच सर्वे पर बनाई गई है।
भारत में 12.4 फीसदी डिवाइसों में मैलवेयर
भारत में मई में विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले 12.4 फीसदी डिवाइसों में मैलवेयर का पता चला। इसका मतलब ये है कि विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करने वालों के साथ सबसे ज्यादा साइबर घटनाएं होती हैं। यह दुनियाभर में सबसे अधिक है। यह आंकड़ा जून में बढ़कर 13.2 फीसदी हो गया था। ऑफिशियल ईमेल पर साइबर हमले 2024 की शुरुआत में 20 फीसदी से बढ़कर 2025 की पहली छमाही तक 25.6 फीसदी हो गए हैं।
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साइबर अपराधी भी कर रहे हैं एआई का इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट कार्ड और पासवर्ड जैसी निजी जानकारी के लिए साइबर अपराधी भी अब एआई का इस्तेमाल करने लगे हैं। जेनरेटिव एआई ने साइबर अपराधियों के लिए बाधाओं को कम कर दिया है। इस कारण अब फिशिंग ईमेल, नकली इनवॉइस और यहां तक कि डीपफेक आधारित घोटालों को तेजी से पता लगाना मुश्किल हो गया है।
भारत के डिजिटल इकोसिस्टम पर कई बड़े खतरे
कोविड के बाद हाइब्रिड वर्क मॉडल ने कंपनियों को इन सिक्योर रिमोट सेटअप के जरिये असुरक्षित बना दिया है। विनिर्माण, सूचना एवं प्रौद्योगिकी सर्विस और दूरसंचार उद्योग भारत के सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल है। रिपोर्ट में इस बात की भी चेतावनी दी गई है कि भारत के डिजिटल इकोसिस्टम पर कई बड़े खतरे मंडरा रहे हैं।