27 नवंबर को भी राज्यसभा में साइबर अपराध को लेकर सवाल किए गए। सवाल करने वाले सांसदों में बाबू भाई जेसंगभाई देसाई, डॉ. मेघा विश्राम कुलकर्णी, डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, अब्दुल वहाब और डॉ. कनिमोझी एनवीएन सोमू शामिल रहे। 3 दिसंबर को लोकसभा में एडवोकेट अदूर प्रकाश, जय प्रकाश, कुलदीप इंदौरा, विजय कुमार उर्फ विजय वसंत और बी. मणिक्कम टैगोर ने साइबर अपराध से जुड़े सवाल किए थे। 10 दिसंबर को सदन में लोकसभा सदस्य ईश्वर स्वामी ने साइबर हमलों को लेकर सवाल पूछा था। उन्होंने साइबर अपराध की रोकथाम के उपायों बाबत जानकारी मांगी। मनोज तिवारी ने पूछा, सीमा पार से साइबर अपराध में किस तरह बढ़ोतरी हो रही है। श्रीभारत मनुकुमिल्लि ने लोकसभा में पूछा, आंध्रप्रदेश में साइबर अपराध की क्या स्थिति है। इस पर कैसे नियंत्रण किया जा रहा है। उसी दिन कनिमोझी करुणानिधि ने भी साइबर अपराध को लेकर सवाल किया था। लोकसभा सदस्य दिलीप शइकिया ने पूछा, देश में साइबर फोरेंसिक क्षमता को किस तरह बढ़ाया जा रहा है।
10 दिसंबर को ही लोकसभा में रूपकुमारी चौधरी, लुम्बा राम, डॉ. के सुधाकर, डॉ. राजेश मिश्रा, विद्युत बरन महतो, दिनेशभाई मकवाणा, राधेश्याम राठिया, रूचि वीरा, श्रीभरत मतुकुमिल्लि, अभिषेक बनर्जी, डॉ. हेमंत विष्णु सवरा, सुरेश कुमार कश्यप, चंद्र प्रकाश जोशी, डॉ. निशिकांत दुबे, प्रवीण पटेल, मुकेश कुमार चंद्रकांत दलाल, तेजस्वी सूर्या, दिलीप शइकीया, विजय कुमार दूबे, विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी, दरोगा प्रसाद सरोज, संजय हरिभाउ जाघव और गनीबेन नागाजी ठाकोर ने भी साइबर अपराध को लेकर सवाल पूछा था। 11 दिसंबर को राज्यसभा में भी साइबर अपराध पर सवाल पूछा गया। राज्यसभा सदस्य जीसी चंद्रशेखर ने साइबर अपराध पर सरकार की सक्रियता जाननी चाहिए तो वहीं राजीव शुक्ला ने पूछा, डिजिटल प्लेटफार्म से कट्टरता बढ़ रही है। केंद्र सरकार, देश में साइबर अपराध रोकने के लिए कौन से प्रभावी कदम उठा रही है।
सरकार की तरफ से जवाब दिया गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में साइबर ठगी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। साइबर अपराध की 9 लाख शिकायतों में समय पर एक्शन लेते हुए लोगों के 3431 करोड़ रुपये बचा लिए गए हैं। इसके अलावा भारत सरकार ने पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर 6.69 लाख से अधिक सिम कार्ड बंद कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं 1,32,000 आईएमईआई को भी ब्लॉक कर दिया गया है। गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने बताया, वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और धोखेबाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए 2021 में I4C के तहत 'सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' लॉन्च किया गया था। लोगों ने इसका फायदा उठाया है। साइबर अपराध की शिकायत, समय रहते दर्ज होने के बाद आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी।
हालांकि सरकार की सख्त कार्रवाई के बाद साइबर अपराधी, ठगी के नए नए तरीके इस्तेमाल करने लगे। I4C के तहत 9.94 लाख से अधिक शिकायतें मिली। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज कराने में लोगों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1930' चालू किया गया है। I4C ने डिजिटल गिरफ्तारी के लिए उपयोग किए गए 1700 से अधिक स्काइप आईडी और 59,000 व्हाट्सएप खातों की सक्रिय रूप से पहचान की और उन्हें ब्लॉक कर दिया। केंद्र सरकार ने राज्य/केंद्रशासित प्रदेश पुलिस, एनसीबी, सीबीआई, आरबीआई और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों का रूप धारण करने वाले साइबर अपराधियों द्वारा 'ब्लैकमेल' और 'डिजिटल गिरफ्तारी' की घटनाओं के खिलाफ लोगों को अलर्ट करने के लिए विस्तृत जागरूकता अभियान चलाया गया है। साइबर अपराध की घटनाओं से बचने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एसएमएस के माध्यम से संदेशों का प्रसार किया जा रहा है।
भारतीय मोबाइल नंबरों को प्रदर्शित करने वाली अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉलों को पहचानने और उन्हें ब्लॉक करने के लिए एक प्रणाली तैयार की गई है। फर्जी डिजिटल गिरफ्तारियों, फेडएक्स घोटालों, सरकारी और पुलिस अधिकारियों के रूप में प्रतिरूपण आदि के हाल के मामलों में साइबर अपराधियों द्वारा इस तरह की अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉल की गई हैं। ऐसी आने वाली अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉल को ब्लॉक करने के लिए टीएसपी को निर्देश जारी किए गए हैं।
दुनिया भर के कट्टरपंथी संगठन, अपनी तोड़फोड़ की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए इंटरनेट की 'काली दुनिया' का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस काली दुनिया के प्लेटफॉर्म पर काम करने की वजह से आतंकी संगठन, अब सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। इन कट्टरपंथी संगठनों तक पहुंचना, सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के लिए आसान नहीं है। इन संगठनों द्वारा मेटावर्स, डार्कनेट और वाइबर सहित दूसरे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर आतंकियों की ऑनलाइन भर्ती की जा रही है।
उक्त प्लेटफार्म के जरिए कट्टरपंथी संगठन, भोले-भाले/उदास/अलग-थलग युवाओं को लक्षित कर रहे हैं। भारत की संप्रभुता व अखंडता को प्रभावित करने वाले सांप्रदायिक और भारत विरोधी प्रचार में शामिल वेबसाइटों/खातों की पहचान की गई है। ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) को केस भेजा जाता है। एमईआईटीवाई ने 9845 यूआरएल ब्लॉक कर दिए हैं। एनआईए द्वारा ऑनलाइन कट्टरपंथ से संबंधित 67 मामलों की जांच की जा रही है। ऐसे मामलों में अब तक जांच एजेंसी 'एनआईए' ने 325 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फ्रांस के ल्योन में 19वें इंटरपोल प्रमुखों के एनसीबी सम्मेलन के पूर्ण सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल सहित सभी प्रतिनिधिमंडलों ने इस बात पर जोर दिया था कि ऑनलाइन कट्टरपंथ, वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इस खतरे से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और बहु-सार्वजनिक सहयोग की आवश्यकता है। पहलूबद्ध रणनीति, जो चरमपंथी सामग्री की आपूर्ति और मांग, दोनों को संबोधित करती है। भारत के लिए सीबीआई, ऑनलाइन कट्टरपंथ से निपटने के लिए इंटरपोल के साथ लगातार जुड़ी हुई है। 18-21 अक्टूबर, 2022 तक नई दिल्ली में आयोजित 90वीं इंटरपोल महासभा के दौरान, इंटरपोल ने पहली बार मेटावर्स का जिक्र किया था। इसके बाद, जनवरी 2024 में, इंटरपोल ने मेटावर्स को लेकर कानून प्रवर्तन परिप्रेक्ष्य पर एक श्वेतपत्र जारी किया था। उसमें कट्टरपंथ के मुद्दे की पहचान की गई।
साथ ही यह भी नोट किया गया कि आतंकवादी ऑनलाइन भर्ती, कट्टरपंथ, प्रशिक्षण और व्यक्तियों की शिक्षा के लिए मेटावर्स का फायदा उठा सकते हैं। इस संबंध में, समग्र और समन्वित तरीके से कट्टरपंथ से जुड़े कई जोखिम कारकों को सामूहिक रूप से पहचानने, काउंटर करने और कट्टरपंथ से निपटने के लिए प्रभावी तंत्र एवं रणनीति स्थापित करने के लिए कट्टरपंथी संगठनों पर इनपुट सहित अन्य जानकारी साझा करने के लिए सभी हितधारकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
समान विचारधारा वाले तत्वों से जुड़ने के लिए कट्टरपंथी संगठनों द्वारा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ व्हाट्सएप के अलावा सिग्नल, टेलीग्राम, वाइबर और डार्क वेब जैसे अधिक सुरक्षित मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है। व्यक्तियों को ऑनलाइन कट्टरपंथी बनाया जा रहा है।
चूंकि साइबर प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग, कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में किया जा रहा है, इसलिए साइबर स्पेस की लगातार निगरानी की जा रही है। ऐसी सामग्री और संस्थाओं की पहचान और निगरानी करने के लिए नियमित आधार पर साइबर गश्त की जाती है। भोले-भाले/उदास/अलग-थलग युवाओं को लक्षित करने वाले कट्टपंथी संगठनों पर नजर रहती है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।
भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाले सांप्रदायिक और भारत विरोधी प्रचार में शामिल वेबसाइटों/खातों की पहचान की जा रही है। ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) को भेजा जा रहा है। यह मंत्रालय, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत निर्देश जारी करता है। इसके जरिए सरकार को विशिष्ट परिस्थितियों में सार्वजनिक पहुंच से जानकारी को अवरुद्ध करने का अधिकार मिल जाता है।
भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध और सार्वजनिक व्यवस्था, अगर इनके लिए कोई खतरा पैदा करता है तो सूचना प्रौद्योगिकी में प्रदान की गई उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद उपरोक्त से संबंधित किसी भी संज्ञेय अपराध के लिए उकसावे को रोकने के लिए मंत्रालय (जनता द्वारा सूचना तक पहुंच को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया और सुरक्षा) नियम, 2009 के तहत दिशा निर्देश जारी कर सकता है।
इसके अलावा, आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3) (बी) के तहत, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), गृह मंत्रालय को भी 'टेक डाउन नोटिस' जारी करने के लिए एक एजेंसी के रूप में अधिकृत/नामित किया गया है। गैरकानूनी सामग्री को हटाने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र भी मध्यस्थ/मंच की भूमिका निभाता है। वर्तमान में, राज्य पुलिस के अलावा, एनआईए ऑनलाइन कट्टरपंथ से संबंधित 67 मामलों की जांच कर रही है। इन मामलों में अब तक 325 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, 336 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है। 63 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। एमईआईटीवाई ने अक्टूबर, 2024 तक 9845 यूआरएल (जिसमें कट्टरपंथी सामग्री भी शामिल है) को ब्लॉक करने के निर्देश जारी किए हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद सत्र के दौरान यह जानकारी दी है।