West Bengal: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आज जादवपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल नहीं हुए। उनके प्रतिनिधि काजी मसूद अख्तर ने बताया कि समारोह के लिए नियमों का पालन न होने राज्यपाल नाराज हैं और खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के राज्य सी.वी. आनंद बोस ने मंगलवार को जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) के दीक्षांत समारोह में भाग नहीं लिया। इससे पहले राजभवन ने कहा था कि बिना नियमों का पालन किए समारोह का आयोजन किया जा रहा है। बोस जेयू के कुलाधिपति भी हैं। एक दिन पहले उन्होंने विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति भास्कर गुप्ता को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा था कि नियम-कानून को नजरअंदाज करते हुए समारोह का आयोजन किया जा रहा है। राज्यपाल ने इसे 'गैरकानूनी' करार दिया था।
विज्ञापन
दीक्षांत समारोह में भाग लेने के बाद कुलाधिपति के प्रतिनिधि काजी मसूद अख्तर ने 'पीटीआई' से कहा, 'राजभवन निराश है और राज्यपाल नियमों का पालन न होने से नाराज हैं और अपमानित महसूस कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति न होने और अनिवार्य विश्वविद्यालय कोर्ट की बैठक के लिए कोई पूर्व सूचना न दिए जाने के कारण राज्यपाल इसे (दीक्षांत समारोह) अवैध और कदाचार से भरा मानते हैं।'
हालांकि, अख्तर ने यह भी कहा कि 24 दिसंबर को दीक्षांत समारोह की तारीख वर्षों से तय थी। लेकिन विशेष परिस्थितियों में इसे टाला जा सकता था। उन्होंने कहा, मैं आज इस कार्यक्रम में राज्यपाल से अनुमति लेकर आया हूं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति न होने और अनिवार्य विश्वविद्यालय कोर्ट की बैठक के लिए कोई पूर्व सूचना न दिए जाने के कारण राज्यपाल इसे (दीक्षांत समारोह) अवैध और कदाचार से भरा मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मास कम्युनिकेशंस के छात्रों ने अपनी परीक्षा के उत्तर पत्रों (आंसरशीट) का सही तरीके से मूल्यांकन न होने का आरोप लगाया था। जिसे समारोह से पहले संबोधित किया जाना चाहिए था।
पिछले साल भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब कार्यवाहक कुलपति बुद्धदेव सॉ को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कार्यवाहक कुलपति भास्कर गुप्ता ने कहा, यह दुखद है कि कुलाधिपति दीक्षांत समारोह में शामिल न हो सके। अच्छा होता अगर वह समारोह में होते। लेकिन यह उनका फैसला था। गुप्ता ने कहा कि उन्होंने हमेशा ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम किया है।