भट्ट के वकील ने दलील दी कि इस मामले पूर्वाग्रह की उचित आशंका है, क्योंकि जस्टिस शाह ने इसी प्राथमिकी से जुड़ी उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में फटकार लगाई थी। लेकिन गुजरात सरकार के वकील और शिकायतकर्ता ने इसका विरोध किया था और पूछा कि उन्होंने पहले आपत्ति क्यों नहीं की।
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने कहा कि वह भट्ट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत, गुजरात सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे मनिंदर सिंह और शिकायतकर्ता की ओर से पेश आत्माराम नाडकर्णी की दलीलें सुनने के बाद बुधवार को यह आदेश पारित करेगी।
भट्ट ने प्रभुदास वैष्णानी की हिरासत में मौत के मामले में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। एक सांप्रदायिक दंगे के बाद जामनगर पुलिस ने प्रभुदास को गिरफ्तार किया था। इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही कामत ने कहा कि हाईकोर्ट के जज के रूप में जस्टिस शाह ने भट्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई थी।
कामत ने कहा, मैं इस कोर्ट का बहुत सम्मान करता हूं। लेकिन न्याय न केवल किया जाना चाहिए, बल्कि किया हुआ दिखना भी चाहिए। न्यायिक मर्यादा की मांग है कि लॉर्डशिप इस मामले की सुनवाई न करे। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पूर्वाग्रह की उचित आशंका का है।
संजीव भट्ट की दलील में नेकनीयती नहीं: गुजरात सरकार
गुजरात सरकार के वकील मनिंदर सिंह ने मामले से हटने की भट्ट की याचिका का विरोध किया और कहा कि उनकी दलील में कोई नेकनीयती नहीं है। उन्होंने कहा, जस्टिस शाह ने कई अन्य मामलों की सुनवाई की है जहां इस तरह का कोई अनुरोध नहीं किया गया। सिंह ने कहा, आप चयनात्मक आधार (सेलेक्टिव बेस) पर सुनवाई से हटने की प्रार्थना नहीं कर सकते। सुनवाई से अलग होने के लिए चयनात्मक अनुरोध करना कोर्ट की अवमानना होगी।
शिकायतकर्ता के वकील ने कहा- भट्ट के खिलाफ अदालतों ने की सख्ती
शिकायतकर्ता के वकील नाडकर्णी ने राज्य सरकार के विचारों से सहमति जताई और कहा कि पहले से उपलब्ध अवसर पर आपत्ति दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, यह फोरम शॉपिंग है। ज्यादातर अदालतों ने मामले की सुनवाई के दौरान उनके (भट्ट) खिलाफ सख्ती की है। अगस्त 2022 में भट्ट ने शीर्ष कोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली थी, जिसमें 30 साल पुराने हिरासत में मौत के मामले में उनकी उम्रकैद की सजा निलंबित करने की मांग की गई थी।
जून 2019 में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा
हाईकोर्ट ने इससे पहले भट्ट की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उनके मन में अदालतों के प्रति बहुत कम सम्मान है और उन्होंने जानबूझकर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश की। उन्हें इस मामले में जून 2019 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
क्या था पूरा मामला
यह मामला प्रभुदास वैष्णानी की हिरासत में मौत से जुड़ा है। प्रभुदास, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के मद्देनजर बंद के आह्वान के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़कने के बाद जामनगर पुलिस द्वारा पकड़े गए 133 लोगों में शामिल थे। भट्ट उस समय जामनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात थे। इसके बाद उनके भाई ने भट्ट और छह अन्य पुलिसकर्मियों पर हिरासत में वैष्णानी को यातना देकर मारने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।