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CSS: पदोन्नति के लिए सीएसएस अधिकारियों ने लगाई पीएम से गुहार, नहीं मिल रहा लाभ; समझिए मामले से जुड़ा हर पहलू

सार

सीएसएस फोरम ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कैडर रिव्यू और ओजीएएस समावेशन सहित लंबे समय से लंबित सीएसएस सुधारों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सीएसएस फोरम के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को कैबिनेट सचिव से मुलाकात की।
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CSS - फोटो : सीएसएस
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विस्तार
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केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन 'सीएसएस फोरम' ने पदोन्नति एवं दूसरे मुद्दों को लेकर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है। फोरम ने पीएम को लिखे अपने पत्र में कहा है कि डीओपीटी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जवाब दिया था कि एएसओ 2014 बैच की पदोन्नति हो गई है। सच्चाई यह है कि उक्त बैच को अभी तक पदोन्नति नहीं मिली है। वह प्रक्रिया लंबित है। पदोन्नति से जुड़ी फाइल, व्यय विभाग के पास है। इस बाबत सीएसएस फोरम ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने की मांग की है। फोरम के सदस्यों ने कैबिनेट सचिव से मुलाकात कर उन्हें केंद्रीय सचिवालय सेवा में पदोन्नति, कैडर रिव्यू, ओजीएएस, एनएफयू व एनएफएसजी जैसे लंबित मुद्दों के बारे में बताया। सीएसएस फोरम ने इन मुद्दों का त्वरित गति से समाधान करने की मांग की है। 

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सीएसएस फोरम ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कैडर रिव्यू और ओजीएएस समावेशन सहित लंबे समय से लंबित सीएसएस सुधारों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सीएसएस फोरम के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को कैबिनेट सचिव से मुलाकात की। सीएसएस में कैडर समीक्षा और करियर ठहराव में एक हजार से अधिक दिनों की देरी, ऐसे कई लंबित मुद्दों को उजागर करते हुए कैबिनेट सचिव को एक प्रतिवेदन सौंपा। सीएसएस फोरम ने कैडर समीक्षा और ओजीएएस मान्यता की तत्काल मंजूरी का आग्रह किया है। पदोन्नति में ठहराव को समाप्त कर केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों को न्याय प्रदान किया जाए। 

पत्र में कहा गया है कि सीएसएस, भारत सरकार की एक प्रतिष्ठित, संगठित व ऐतिहासिक सेवा है। यह सेवा, सभी मंत्रालयों एवं विभागों में प्रशासनिक निरंतरता, संस्थागत स्मृति तथा नीति निर्माण एवं क्रियान्वयन की आधारशिला के रूप में कार्य करती है। हाल के वर्षों में इस सेवा से संबंधित अधिकारियों को पदोन्नति में अत्यधिक विलंब, गंभीर कैडर ठहराव तथा अन्य संगठित सेवाओं की तुलना में सुविधाओं की असमानता जैसी जटिल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल सेवा के अधिकारियों के मनोबल एवं प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित कर रही है, अपितु शासन व्यवस्था की समग्र क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। 
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फोरम के पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार की रीढ़ कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' के 2014 बैच के एएसओ को, तय समय सीमा के बाद भी पदोन्नति नहीं मिल पा रही।
ये अधिकारी पदोन्नति के मोर्चे पर लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। पहले 2013 बैच के सहायक सेक्शन अफसरों (एएसओ) को लंबे संघर्ष के बाद पदोन्नति मिली थी। अब 2014 बैच के एएसओ पदोन्नति के लिए संघर्षरत हैं। पिछले दिनों कई सांसदों और विधायकों ने डीओपीटी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अविलंब एएसओ को पदोन्नत करने का आग्रह किया था। इन सांसदों और विधायकों ने अपने पत्र में लिखा था, दस साल की सेवा के निर्धारित कार्यकाल के बाद भी 'एएसओ' को 'एसओ' के पद पर पदोन्नति नहीं मिल सकी। नियमानुसार, इन 'एएसओ' को आठ साल में पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। यानी ये 2023 से पदोन्नति के हकदार थे। 

सीएसएस फोरम के मुताबिक, दूसरा बड़ा मुद्दा सीएसएस 'कैडर पुनर्गठन समिति' की रिपोर्ट का है। यह कैडर रिपोर्ट 1000 से भी अधिक दिनों से ठंडे बस्ते में पड़ी है। अगर इस रिपोर्ट को डीओपीटी/पीएमओ से हरी झंडी मिल जाए तो सीएसएस कैडर में पदोन्नति की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। तुरंत प्रभाव से सेक्शन अफसर 'एसओ' के लगभग आठ सौ पद सृजित हो सकते हैं। दूसरे पदों पर भी पदोन्नति की राह खुल जाएगी। 2013 बैच के एएसओ को भी आसानी से पदोन्नति नहीं मिली थी। इसके लिए नॉर्थ ब्लॉक, विजय चौक और विभिन्न मंत्रालयों में विरोध प्रदर्शन किया गया था। तब जाकर पदोन्नति दी गई। अब 2014 बैच के एएसओ को परमोशन देने का मामला अटक गया है। 

इन अधिकारियों की एएसओ के पद पर सेवा के 10 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन अभी तक पदोन्नति आदेश जारी नहीं हुआ। ये अधिकारी 'एएसओ', पदोन्नति की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। नियम यह कहता है कि इन्हें आठ साल के सेवाकाल के बाद ही पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। लगभग सात-आठ सौ एएसओ, दो वर्ष पहले पदोन्नति के हकदार थे। अब 2015 बैच के 'एएसओ' भी 'एसओ' बनने के लिए पदोन्नति की कतार में हैं। 2014 बैच के कुछ एएसओ को पदोन्नति मिली है, लेकिन वह यूपीएससी के माध्यम से विभागीय परीक्षा पास करने के बाद। पांच साल के बाद इस परीक्षा में बैठने का अवसर मिलता है। अधिकांश एएसओ, वरिष्ठता के आधार पर एसओ की पदोन्नति की लाइन में हैं। 

फोरम के सदस्यों का कहना है कि कैडर रिव्यू रिपोर्ट तीन साल पहले तैयार की गई थी। अब वह फाइल डीओपीटी/पीएमओ के पास है। अगर यह रिपोर्ट लागू हो जाए तो करीब 800 पद, एसओ के मिल जाएंगे। इससे सभी स्तरों पर पदोन्नति का रास्ता खुल जाएगा। सीएसएस कैडर में कुल 13500 अधिकारी कार्यरत हैं। सीएसएस फोरम की मांग है कि सीआरसी की रिपोर्ट को जल्द से जल्द लागू किया जाए। सीआरसी की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और उसके कार्यान्वयन में हो रही देरी से सीएसएस अधिकारी, पदोन्नति की राह पर पिछड़ गए हैं। 

सीएसएस कैडर, अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें समय पर पदोन्नति नहीं दी जा रही। केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में करीब 2600 अतिरिक्त पदों की आवश्यकता है। इस बाबत सभी विभागों ने डीओपीटी को यह सूची मुहैया कराई थी। इसमें एएसओ, एसओ, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर के पद शामिल हैं। एक तरफ सीएसएस अधिकारियों को तय समय पर पदोन्नति नहीं मिल पा रही है तो दूसरी ओर रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा। सीएसएस फोरम, 'कैडर पुनर्गठन समिति' (सीआरसी) की रिपोर्ट को अविलंब लागू करने की मांग कर रही है। 

केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में जनशक्ति की आवश्यकता का आकलन करने के लिए अक्टूबर, 2022 में एक कैडर पुनर्गठन समिति बनाई गई थी। गहन विचार-विमर्श के बाद सभी विभागों ने तीन वर्ष पहले ही अपनी आवश्यकताएं समिति को भेज दी थीं। आरटीआई से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीन साल पहले केवल बीस विभागों के लिए ही 2500 से अधिक जनशक्ति की आवश्यकता थी। यदि सभी विभागों के आंकड़ों पर विचार किया जाए तो यह संख्या बहुत बड़ी होगी। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों ने सीएसएस कैडर के तहत अतिरिक्त पदों की जरुरत बताई है। ऐसे पदों की संख्या 2600 से अधिक है। इनमें सहायक सेक्शन अफसर, सेक्शन अफसर, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर और संयुक्त सचिव के पद शामिल हैं। जनशक्ति की कमी से विभागों में दक्षता प्रभावित हो रही है। सीएसएस फोरम का कहना है कि दक्षता में कमी, पीएम मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा है।  

अंडर सेक्रेटरी को डिप्टी सेक्रेटरी के पद तक पहुंचने में 13 साल लग रहे हैं। मौजूदा समय में लगभग 1000 अंडर सेक्रेटरी ऐसे हैं, जो डिप्टी सेक्रेटरी बनने की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। लंबे समय से इन्हें पदोन्नति का इंतजार है। लगभग 100 डिप्टी सेक्रेटरी ऐसे हैं, जिन्होंने डायरेक्टर बनने के सभी पड़ाव पार कर लिए हैं, मगर ये सभी अधिकारी एक ही पद पर काम करने को मजबूर हैं। डेढ़ वर्ष से कैडर समीक्षा रिपोर्ट लंबित है। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों ने केंद्रीय सचिवालय सेवा के तहत अतिरिक्त पदों की आवश्यकता बताई है। 

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