कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सेंट्रल ग्रुप 'ए' सेवा के 60 और अखिल भारतीय सेवा के 117 कैडर रिव्यू पूरे किए जाने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। डीओपीटी ने इसे 'कैडर रिव्यू व्यवस्था' को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार की रीढ़ कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' के अधिकारी इस उपलब्धि से नाखुश हैं। वजह, उनके कैडर रिव्यू की फाइल लंबे समय से अटकी है। 'सीएसएस फोरम' ने कहा, 1431 दिन से कैडर रिपोर्ट लंबित है। इस बाबत फोरम, कई बार डीओपीटी मंत्री और सचिव से मिलकर कैडर रिव्यू प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह कर चुकी है।
पहला कैडर रिव्यू:
फरवरी 2001 में कमेटी गठित की गई। फरवरी 2002 में रिपोर्ट जमा की गई। इस प्रक्रिया में 12 महीने का समय लगा।
दूसरा कैडर रिव्यू:
जून 2008 में कमेटी गठित की गई। नवंबर 2002 में रिपोर्ट जमा की गई। इस प्रक्रिया में 5 महीने का समय लगा।
तीसरा कैडर रिव्यू:
अप्रैल 2013 में कमेटी गठित की गई। दिसंबर 2013 में रिपोर्ट जमा की गई। इस प्रक्रिया में 8 महीने का समय लगा।
चौथा कैडर रिव्यू:
अक्तूबर 2022 में कमेटी गठित की गई। सितंबर 2026 तक यानी 47 महीने से रिपोर्ट पेंडिंग है। 1431 दिन से हो रहा इंतजार।
सीएसएस फोरम के मुताबिक, यह केवल अधिकारियों के करियर से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि केंद्रीय सचिवालय की प्रशासनिक क्षमता और सरकार की कार्यकुशलता से भी जुड़ा है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीएसएस कैडर में कई मंत्रालयों/विभागों ने लगभग 3,000 अतिरिक्त पदों की आवश्यकता बताई है। फोरम ने डीओपीटी से आग्रह किया है कि जिस गति से अन्य कैडर रिव्यू पूरे किए जा रहे हैं, उसी प्राथमिकता के साथ सीएसएस कैडर रिव्यू को भी शीघ्र एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।