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एनसीपीसीआर ने मेटा इंडिया के प्रमुख तलब: बच्चों के अश्लील विज्ञापनों से कमाई का क्या मामला? रिपोर्ट में खुलासा

Tue, 08 Sep 2026 07:51 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण और दुरुपयोग सामग्री से जुड़े कथित विज्ञापनों के मामले में जांच शुरू करने का फैसला किया है। एनसीपीसीआर ने 3 जुलाई 2026 को बीबीसी आई की रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. को नोटिस जारी किया था और स्पष्टीकरण मांगा था। मेटा ने एक सप्ताह बाद अपना जवाब सौंपा।
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बाल शोषण सामग्री के कथित विज्ञापनों का मामला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने मेटा प्लेटफॉर्म्स से जुड़े बाल यौन शोषण और दुरुपयोग सामग्री के कथित विज्ञापनों के मामले में जांच शुरू करने का फैसला किया है। आयोग ने इसी सिलसिले में मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को 9 सितंबर को तलब किया है।
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एनसीपीसीआर ने 3 जुलाई 2026 को बीबीसी आई की एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. को नोटिस जारी किया था। रिपोर्ट में इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण और दुरुपयोग सामग्री से जुड़े कथित विज्ञापनों का मामला सामने आया था।

मेटा इंडिया के प्रमुख को किया तलब
आयोग ने इस मामले में मेटा से स्पष्टीकरण मांगा था। मेटा ने इसके जवाब में एक सप्ताह बाद अपना पक्ष आयोग को सौंपा। अब एनसीपीसीआर ने मामले के तथ्यों का पता लगाने के लिए औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया है। इसी कार्रवाई के तहत आयोग ने अब मेटा इंडिया के एमडी और प्रमुख को 9 सितंबर को पेश होने और मामले में अतिरिक्त जानकारी देने के लिए बुलाया है।
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आयोग की जांच का उद्देश्य आरोपों से जुड़े तथ्यों का पता लगाना और मेटा की ओर से दिए गए जवाब की जांच करना है। इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मेटा के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम पर भारत में बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) को बढ़ावा देने वाले भुगतान किए गए विज्ञापनों के आरोपों की व्यापक जांच करने का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया था।

बीबीसी आई की जांच में क्या सामने आया?
बीबीसी आई की नई जांच के अनुसार, भारत में इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने वाले कथित विज्ञापन चलाए जा रहे थे और उनसे कमाई की जा रही थी। जांच के मुताबिक, इन विज्ञापनों के जरिए उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम जैसे संदेश भेजने वाले एप पर पहुंचाया जाता था, जहां कथित तौर पर शोषण की वीडियो सामग्री खरीदी जा सकती थी।

रिपोर्ट के अनुसार, बीबीसी की पत्रकार ने अपने इंस्टाग्राम फीड पर ऐसे विज्ञापन देखे। इसके बाद उन्होंने भारतीय साइबर पुलिस से मुलाकात की, मेटा के एक पूर्व अधिकारी का पता लगाया और एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से बातचीत की। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कहा कि बीबीसी की जांच में सामने आए तथ्य इतने गंभीर हैं कि भारत का सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कार्रवाई कर सकता है।

मेटा ने बीबीसी को क्या बताया?
मेटा ने बीबीसी को बताया कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों के शोषण से लड़ने के लिए काम करता है। कंपनी ने कहा कि वह अपनी नीतियों का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों को हटाती है और ऐसी सामग्री की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देती है। अब एनसीपीसीआर की ओर से मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को तलब किए जाने के बाद मामले में आयोग की जांच आगे बढ़ेगी।
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