हम सबको पता है की कोरोना की जंग में हमारे डॉक्टर और अस्पतालों ने कितनी मदद की, लेकिन क्या आपको पता है कि चिकित्सकीय संस्थानों के सिवा भी और बहुत से देश के ऐसे संस्थान हैं जो कोरोना की लड़ाई में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं। ऐसा ही एक संस्थान है सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च)। देश में कोरोना का पहला मामला आने के साथ ही वैक्सीन तैयार करने तक की प्रक्रिया में सीएसआईआर से जुड़ी देशभर की 37 लैबोरेटरीज में बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े शोध और तकनीकि विकास के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों ने दिन रात एक कर दिया। यही वजह रही कि वैज्ञानिकों को वायरस की आधुनिक फेलूरा जांच और एमआरएनए प्लेटफॉर्म विकसित करने में सफलता मिली।
संस्थान के महानिदेशक डॉ. शेखर मांडे ने अमर उजाला डॉट काम से बातचीत की। उन्होंने ने बताया कि पूरे कोरोना कल में सीएसआईआर की दो लैबोरेटरीज की अहम भूमिका रही। आईजीआईबी ने दो बड़े सीरो सर्वेक्षण कराएं, जिससे डेमोग्राफिक स्तर पर वायरस के फैलाव की जानकारी मिली। इसमें विशेष सर्विलांस मैकेनिज्म की सहायता से क्लस्टर एरिया में संक्रमण और स्ट्रेन के म्यूटेशन का पता चल पाया। वहीं, सीसीएमबी ने वायरस के जीनोम की डिकोडिंग करने में अहम योगदान दिया, जिससे कम समय में कोरोना की वैक्सीन को तैयार किया जा सका।
सवाल: बड़ा चैलेंज रहा होगा दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी से लड़ने और उसके निदान के लिए मदद करने में?
जवाब: जब सब मिलकर लड़ रहे थे तो जंग जीतने की दिशा में बढ़ना ही था। देश में कोरोना के पहले मामले के साथ ही हमारी पूरी टीम ने इस गंभीर बीमारी से लड़ने और उसके निदान में आगे बढ़ना शुरू कर दिया था।
सवाल: भारत में कई जगह वायरस का म्यूटेशन देखा जा रहा है? यह म्यूटेशन कितने गंभीर हैं?
जवाब: जब एक वायरस मानव शरीर में प्रवेश करता है तो म्यूटेशन होना स्वाभाविक है। बीते साल सितंबर में यूके में म्यूटेंट एन501वाई और बी117 वायरस के मामले देखे गए, लेकिन अब तीस अन्य देशों में भी म्यूटेट वायरस के मामले देखे जा रहे हैं। यूके वेरिएंट बी117 को अधिक ट्रांसमिसेबल माना जा रहा है। हमें अभी यह नहीं पता है कि नया म्यूटेंट अधिक जानलेवा है या नहीं। दक्षिण अफ्रीका से प्रसारित कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वहां एस्ट्राजेनेका वैक्सीन नये वेरिएंट के प्रति कारगर या प्रभावी नहीं है। दक्षिण अफ्रीका के मनौस प्रांत में 76 प्रतिशत आबादी में कोविड-19 के प्रति एंटीबॉडी पाई गई थी। उसके बावजूद वहां केस में बढ़ोतरी हुई। यह नये स्ट्रेन की वजह से हो सकता है और यह इसलिए भी हो सकता कि लोगों में इम्यूनिटी का स्तर कम हो गया हो। ऐसे में वैक्सीन हमें इम्यूनिटी देगी।
सवाल: भारत में कोरोना की स्थिति अब फिर कई राज्यों में बिगड़ने लगी है। इसके मामले बढ़ने लगे हैं?
जवाब- बीते साल अक्टूबर महीने के बाद लोगों को इस बात का डर था कि त्यौहार के बाद सर्दी आने पर कोरोना के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जाएगी, लेकिन गनीमत रही ऐसा कुछ नहीं हुआ और अक्तूबर से जनवरी महीने के बीच कोरोना के केस में स्थिरता देखी गई। बीते एक महीने में कुछ राज्यों में कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। कुछ अन्य देश भी कोरोना की गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। जब तक कोरोना को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जाता तब तक हमें कोरोना से बचने के लिए, उसके लिए तैयार की गई गाइडलाइंस को फॉलो करना होगा।
सवाल: कोरोना के संदर्भ में अन्य देशों से अनुभव लेते हुए हम भविष्य में किस तरह की उम्मीद कर सकते हैं?
जवाब: जिस तरह विदेशों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, यह वास्तव में चिंता का विषय है। दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और यूके में कोरोना की दूसरी लहर देखी जा रही है। इन देशों से हमें सबक लेना चाहिए कि हम क्या करें। जैसे इजराइल ने बड़े स्तर पर अपने देश में लोगों का टीकाकरण किया जिससे अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या के साथ ही कोरोना के मामलों में भी कमी देखी गई। महामारी अभी खत्म नहीं हुई है और कोरोना वायरस का स्वरूप बहुत ही अप्रत्याशित है।
सवाल: धीरे-धीरे हम सामान्य दिनचर्या की ओर वापस आ रहे हैं, क्या पर्याप्त जनसंख्या को कोरोना का वैक्सीन लगाए बिना सभी पाबंदियां हटाना सही है?
जवाब: लॉकडाउन और अनलॉक दोनों के ही फायदे भी हैं और नुकसान भी। एक बड़ी जनसंख्या में वायरस के फैलाव को रोकने के लिए लॉकडाउन लगाना अनिवार्य था, लेकिन इससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई। अब लॉकडाउन के आर्थिक पहलू को ध्यान में रखने हुए अनलॉक करना भी जरूरी है, लेकिन इससे एक बार फिर कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसलिए हमें इन दोनों ही स्थिति के बीच सामंजस्य बनाना है।
सवाल: वायरस किस तरह बढ़ रहा है? और हमें इससे लड़ने के लिए किस तरह की तैयारी करनी चाहिए?
जवाब: वैक्सीन के जरिये ही बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। जितनी जल्दी हम आबादी के एक बड़े हिस्से का टीकाकरण कर लेगें, उनती ही जल्दी हम महामारी को नियंत्रित कर पाएगें। इस्रायल इस बात का सबसे बेहतर उदाहरण है और हमें उसका अनुपालन करना चाहिए। कोरोना वैश्विक बीमारी है और हम संक्रमण से तब ही सुरक्षित हो सकते हैं जब सभी प्रभावित देश कोरोना संक्रमण को नियंत्रित कर पाएंगे। इसके साथ ही हमें यह भी ध्यान रखना है कि वैक्सीन को इस प्रकार से तैयार किया जाए कि समय पड़ने पर वह नए म्यूटेंट वायरस पर भी प्रभावकारी हो, जिसके लिए हमें नई वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के लिए भी तैयार रहना होगा।
सवाल: कोरोना महामारी के खिलाफ इस जंग में हम आधुनिक तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि को किस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है?
जवाब: एआई या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से हम बीमारी की जल्द पहचान कर इलाज शुरू कर सकते हैं। अन्य आधुनिक तकनीक जैसे नये वैक्सीन बनाने के लिए एमआरएनए प्लेटफॉर्म का प्रयोग करना, वायरस की पहचान के लिए क्रिस्पर सीएएस प्लेटफार्म का इस्तेमाल आदि ने कोरोना के खिलाफ हमें सशक्त बनाया है। सौभाग्य से भारत तकनीकी रूप से काफी दक्ष है। हमारे पास वह सभी आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं जो विश्व में कहीं भी हैं। कई मामलों में हम अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान हमने कम कीमत वाली स्वदेशी जांच किट फेलूदा को विकसित किया।
सवाल: हमारे सर्विलांस सिस्टम (निगरानी तंत्र) को मजबूत करना कितना जरूरी है?
जवाब: निगरानी तंत्र की सहायता से हम सीवेज और हवा के सैंपल के माध्यम से दोबारा संक्रमण होने के खतरे के बारे में पता लगा सकते हैं। किसी भी नये म्यूटेंट की जल्द पहचान और फैलाव के स्तर का पता लगाना आवश्यक होता है। हमारे दो संस्थान आईजीआईबी दिल्ली और सीसीएमबी हैदराबाद को निगरानी तंत्र के लिए विश्वभर में सबसे श्रेष्ठ माना गया है।