यह है एनकैप व गैर-एनकैप
- 16 एनकैप शहरों और 15 गैर-एनकैप शहरों में पीएम 2.5 की वृद्धि बहुत तेज रही। लॉकडाउन में 2020 में 12% औसत प्रदूषण घटा। लेकिन 2021 में एनकैप शहरों में 8% तो गैर-एनकैप शहरों में 7% प्रदूषण बढ़ गया।
- एनकैप व गैर-एनकैप दोनों के 39-39 शहरों में प्रदूषण राष्ट्रीय मानकों से अधिक था। इसी तरह दोनों श्रेणियों में सुधार भी क्रमश : 20 और 21 शहरों में हुआ।
- दिल्ली में 2020 में प्रदूषण 13% घटा था, 2021 में 13% वापस बढ़ गया।
उत्तर भारत के हालात
एनकैप शहरों में गाजियाबाद सबसे ज्यादा प्रदूषित मिला इसके बाद दिल्ली थी। 8 एनकैप और 16 गैर-एनकैप शहरों में प्रदूषण क्षेत्रीय औसत से अधिक मिला।
अध्ययन : शिशु में बढ़ा मोटापा व मधुमेह का जोखिम
एक चिकित्सीय अध्ययन में पता चला है कि जन्म से छह महीने के बीच वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले बच्चों में एलर्जी, मोटापा और मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है। यहां तक कि इनमें मस्तिष्क विकास पर भी असर पड़ सकता है।
- मेडिकल जर्नल गट माइक्रोब्स में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा है...शिशु के पेट में मौजूद बैक्टीरिया प्रभावित होने के कारण अन्य जोखिम बढ़ जाते हैं।
- कोलोराडो बोल्डर विवि के सहायक प्रोफेसर तान्या एल्डरेटे ने बताया, बच्चों में वायु प्रदूषण जोखिम, विकास और महत्वपूर्ण प्रभावों के साथ पेट में मौजूद माइक्रोबायम पर गंभीर असर डालता है।
- अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दक्षिणी कैलिफोर्निया में 103 शिशुओं के मल नमूनाें का विश्लेषण किया था जिसमें उन्होंने पीएम 2.5 और पीएम 10 प्रदूषित कण मिले। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे रासायनिक कण भी शामिल थे।