क्रिप्टोकरेंसी
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बीते मंगलवार को सरकार ने घोषणा की है कि वह क्रिप्टोकरेंसी पर विधेयक लेकर आएगी। सरकार ने कहा है कि कि वो भारत में सभी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने जा रही और वह खुद की एक आधिकारिक क्रिप्टोकरेंसी लाएगी। इसके लिए सरकार एक विधेयक लेकर आएगी जो सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश हो सकता है। यह खबर सुनते ही क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में मची हलचल अब भी जारी है। लगभग बड़े क्रिप्टोकरेंसी में 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। और अनुमान है कि करीब 10 करोड़ क्रिप्टो निवेशक इस घोषणा से घबरा गए हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबकि, देश की लगभग आठ फीसदी आबाद ने कई तरह की डिजिटल मुद्राओं में निवेश किया हुआ है। ऐसे में अगर सरकार डिजिटल मुद्रा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाती है तो इन निवेशकों को तगड़ा झटका लगेगा। इन निवेशकों ने करीब 70 हजार करोड़ रुपये वर्तमान में दुनियाभर में प्रचलित कई तरह की डिजिटल करेंसी में लगाए हुए है।
वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने क्रिप्टोकरेंसी पर सरकार की मंशा साफ कर दी है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि देश में क्रिप्टोकरेंसी को किसी भी दशा में लीगल टेंडर नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि लेनदेन में इस करेंसी का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। वित्त सचिव के अनुसार, संसद में क्रिप्टो बिल पेश करने से पहले काफी अध्ययन किया जा रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी
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पहले जानिए क्या है क्रिप्टोकरेंसी
यह एक डिजिटल करेंसी होती है, जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है। इसे आप देख या छू नहीं सकते। यह छुपा हुआ होता है। लीमन ब्रदर्स कांड के बाद 2008 में इस आभासी करेंसी का उदय हुआ है। इस करेंसी में कोडिंग तकनीक का प्रयोग होता है। यह कंप्यूटर एल्गोरिद्म पर बनी हुई है। इसका कोई रेगुलेटर नहीं और कोई क्रिप्टोकरेंसी को कंट्रोल नहीं करता।
इस तकनीक के जरिए करेंसी के लेन-देन का पूरा लेखा-जोखा होता है, जिसे हैक करना बहुत मुश्किल माना जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी का जाल लगातार बिछ रहा है। बिटकॉइन की कीमत में पिछले 11 साल में एक लाख गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं कुछेक क्रिप्टो करेंसी में पिछले एक साल में ही 10 हजार गुना तक का फायदा मिला है। डिजिटल करेंसी का अध्ययन करने वाली एक संस्था के अनुसार, अप्रैल 2020 में भारतीयों ने इसमें 92 करोड़ डॉलर का निवेश किया था, जो इस साल मई में बढ़कर 6.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
क्या है क्रिप्टोकरेंसी बिल और क्या है इसका मकसद?
सरकार क्रिप्टोकरेंसी के नियम को मजबूत बनाने के लिए जो विधेयक ला रही है उसका नाम है- क्रिप्टोकरेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक 2021 (Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2021)। यह विधेयक 2019 में बने क्रिप्टोक्यूरेंसी पर प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक, 2019 से अलग है। जिसे कुछ साल पहले वित्त मंत्रालय के अर्थशास्त्र मामलों के विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सेबी और आरबीआई के प्रतिनिधियों वाली एक अंतर-मंत्रालयी समिति ने जिसकी सिफारिश की थी, लेकिन इसे संसद में नहीं पेश किया जा सका था। पुराने विधेयक में क्रिप्टोकरेंसी की खरीद, होल्डिंग, बिक्री समेत क्रिप्टो-संबंधित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
कैसे अस्तित्व में आई क्रिप्टोकरेंसी?
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नए विधेयक के जरिए सरकार रिजर्व बैंक इंडिया के तहत एक आधिकारिक क्रिप्टोकरेंसी जारी करने के लिए एक नियामक तैयार करना चाहती है। बताया जा रहा है कि सरकार इसके जरिए क्रिप्टो करेंसी के आधार वाली तकनीक ब्लॉकचेन को रक्षा कवच देना चाहती है।
इस विधेयक के तहत ऐसा प्रावधान लाया जा सकता है जिससे सारी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी (जिसके लेनदेन की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती है) पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। हालांकि, इसके तकनीक और इस्तेमाल को प्रमोट करने के लिए कुछ अपवाद रखे जाएंगे।
संभावना यह भी है कि सरकार इस पर टैक्स लगा सकती है। सरकार अपना खुद का वॉलेट ला सकती है जिसे आरबीआई जारी कर सकता है। इससे क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री हो सकती है।
विधेयक लाने की जरूरत क्यों पड़ रही
देश में बड़े पैमाने पर लोग क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी के मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव होता रहता है। ऐसे में पता ही नहीं होता कि यह कहां से शुरू होता है, इसका संचालन कहां से हो रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसमें ज्यादा रिस्क होने के बावजूद तेजी से मुनाफा और रिटर्न मिलता है। वजह से कुछ गैर कानूनी धंधों में भी इसके निवेश की आशंका बनी हुई है। लिहाजा सरकार को इसके लिए नियम बनाने की जरूरत महसूस हुई।
क्रिप्टोकरेंसी
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 15 नवंबर को वित्त मामलों की संसद की स्थायी समिति ने क्रिप्टोकरेंसी के सभी हितधारकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक की। जिसमें क्रिप्टोकरेंसी लिए नियम बनाने और इससे जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार किया गया। बताया जा रहा है कि इस बैठक में यह आम राय यह बनी कि क्रिप्टोकरेंसी को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके लिए नियमन की जरूरत है।
वहीं 18 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘द सिडनी डायलॉग’ में अपने संबोधन के दौरान क्रिप्टोकरेंसी पर अपनी चिंता जाहिर की थी। पीएम ने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बिटकॉइन गलत हाथों में न जाए, जो हमारे युवाओं को खराब कर सकता है। पीएम की यह चिंता इसलिए जायज बताई जा रही है क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी के लिए कानूनी मान्यता नहीं होने की वजह से कई गैरकानूनी कामों में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है। वहीं आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी पिछले हफ्ते कहा कि क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े गहरे मुद्दों पर गहन विमर्श की जरूरत है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
सुप्रीम कोर्ट के वकील, साइबर लॉ एक्सपर्ट और ‘अनमास्किंग वीआईपी’ पुस्तक के लेखक विराग गुप्ता के मुताबिक प्राइवेट क्रिप्टो करेंसी के कारोबार और इस्तेमाल को रोकने के लिए यह जरूरी है कि सरकार इसके लिए ठोस कानून लेकर आए, जिससे देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सकता है। उनका मानना है कि कानून लाने में देरी की वजह से कुछ प्लेयर्स को क्रिप्टोकरेंसी का समानांतर साम्राज्य बनाने का मौका मिला है। वे कहते हैं क्रिप्टोकरेंसी के लिए कोई नियम कानून नहीं होने से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा हो रहा है।
गुप्ता के मुताबिक सिंगापुर के नियामक के अनुसार क्रिप्टो करेंसी का मूल्य अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्वों से नहीं जुड़ा है, इसलिए यह खतरनाक है। वे कहते हैं क्रिप्टोकरंसी और विदेशी कंपनियों की सांठगांठ की जांच होनी चाहिए जिसेस डार्क-नेट के कारोबारियों का असली चेहरा उजागर होगा। इन्हीं खतरों को देखते हुए चीन, रूस और तुर्की ने क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
क्रिप्टोकरेंसी पर बैन
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किन गैर कानूनी कामों में इस्तेमाल होने की आशंका
एक आकलन के मुताबिक क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की तस्करी और ऑनलाइन फिरौती वसूलने जैसे तमाम गैर-कानूनी कामों के लिए होने लगा है। विराग गुप्ता के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लोगों ने खुद ही नियामक और कानून बना लिए और देश की सार्वभौमिकता को चुनौती दी है। अगर इस परंपरा जारी रही तो हवाला, मटका, सट्टा, पोंजी स्कीम और खनिज माफिया के कारोबारी भी खुद ही अपने नियमन की व्यवस्था से अवैध आमदनी पर टैक्स देने लगेंगे और कहेंगे कि वे भी देश की प्रगति में अपना योगदान दे रहे हैं।
वे कहते हैं क्रिप्टो पर कानून बनाने के अलावा, सरकार को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949, आरबीआई अधिनियम, 1934 और भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में "उचित सुरक्षा और कम से कम न्यायिक हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के लिए" आवश्यक प्रावधान करने चाहिए।