देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की महिला एसआई 'जीडी' अंजली, कार्डियक अरेस्ट वाले व्यक्ति के लिए किसी देवदूत से कम नहीं थीं। दिल्ली मेट्रो में जिस समय उस व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट आया, तब वहां कोई डॉक्टर तो था नहीं। एसआई अंजली, ड्यूटी के बाद अपने घर लौट रही थी। उसने देखा कि उस व्यक्ति की हालत बिगड़ रही है। वह बेहोश हो चुका है। चूंकि अंजली को यह मालूम था कि ऐसी स्थिति में बेहोश व्यक्ति को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) कैसे दिया जाता है। उसने बिना कोई देरी किए उस व्यक्ति को सीपीआर दिया। नतीजा, थोड़ी देर में वह व्यक्ति होश में आ गया। उसके बाद अगले स्टेशन पर उस व्यक्ति को मेडिकल सुविधा उपलब्ध करा दी गई।
सीआरपीएफ के मुताबिक, एसआई अंजली की ड्यूटी जंतर मंतर पर लगी हुई थी। ड्यूटी के बाद उसने अपने घर जाने के लिए ब्लू लाइन मेट्रो ली। कीर्ति नगर मेट्रो स्टेशन के निकट उसने देखा कि एक व्यक्ति अचानक गिर पड़ा है। उस व्यक्ति के साथ कोई परिचित भी नहीं था। यह देखकर अंजली तुरंत हरकत में आई। उसे मालूम था कि ऐसी स्थिति में सीपीआर, किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है। सीपीआर एक जीवनरक्षक तकनीक है, जो हृदय की धड़कन रुक जाने पर रक्त प्रवाह को बनाए रखने में कारगर साबित होती है। अंजली, ने उस व्यक्ति को सीपीआर देना प्रारंभ कर दिया।
यही वह क्षण था जो उस व्यक्ति की जान बचाने के लिए बहुत कीमती था। अगर इसमें कोई देरी हो जाती तो उस व्यक्ति की जान बचाना मुश्किल हो जाता। महिला एसआई अंजली ने दो तीन मिनट तक उस व्यक्ति को सीपीआर दिया। कुछ ही देर में उस व्यक्ति को होश आ गया। मेट्रो स्टाफ को सूचित कर दिया गया। अगले स्टेशन पर उस व्यक्ति को उतारा गया। वहां पर उसे मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई गई।