सीआरपीएफ सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ साल से 10 आईजी का ट्रांसपोर्ट भत्ता बंद है। आमतौर पर डीआईजी के ट्रांसपोर्ट भत्ते को आईजी मंजूरी प्रदान करता है। आईजी रैंक पर कार्यरत अफसरों के भत्ते की फाइल डीजी की टेबल से गुजरती है। खास बात ये है कि डीजी ने आईजी के भत्ते वाली फाइल को मंजूरी प्रदान कर दी थी...
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में तैनात आईजी रैंक के 10 अधिकारियों का ट्रांसपोर्ट भत्ता रोक दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि ये भत्ता मार्च 2021 के बाद से बंद है। इसमें कई आईपीएस और कैडर अधिकारी शामिल हैं। इस भत्ते के बंद होने के पीछे जो कारण बताया गया है, उससे केंद्रीय गृह मंत्रालय में अफसरों की नाक की लड़ाई सामने आ रही है। सीआरपीएफ डीजी ने ट्रांसपोर्ट भत्ते को मंजूरी दे दी थी, लेकिन मंत्रालय में एक अधिकारी केवल इस बात पर अड़ गए कि मंजूरी देने से पहले उनसे क्यों नहीं पूछा गया।
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सीआरपीएफ सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ साल से 10 आईजी का ट्रांसपोर्ट भत्ता बंद है। आमतौर पर डीआईजी के ट्रांसपोर्ट भत्ते को आईजी मंजूरी प्रदान करता है। आईजी रैंक पर कार्यरत अफसरों के भत्ते की फाइल डीजी की टेबल से गुजरती है। खास बात ये है कि डीजी ने आईजी के भत्ते वाली फाइल को मंजूरी प्रदान कर दी थी। इसके बावजूद भत्ते पर रोक लग गई। आईजी रैंक के अधिकारियों को मालूम हुआ कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अब इस भत्ते पर रोक लगाई है।
आखिर इस भत्ते पर रोक क्यों लगाई गई, इस पर सूत्रों ने बताया कि ये मामला तो कुछ भी नहीं था। यूं ही इसे तूल दिया जा रहा है। जब फोर्स के डीजी ने भत्ते को मंजूरी प्रदान की है, तो गृह मंत्रालय ने उस पर रोक क्यों लगाई। इस संबंध में बल के सूत्रों का कहना है कि यहां पर 'नाक की लड़ाई' चल रही है। एमएचए ने केवल इसलिए ट्रांसपोर्ट भत्ते पर रोक लगा दी, क्योंकि डीजी ने भत्ते की स्वीकृति देने से पहले मंत्रालय से नहीं पूछा था। एक अधिकारी का भत्ता करीब 20 हजार रुपये प्रति माह है। साल में यह राशि लगभग ढाई लाख रुपये हो जाती है।